पानीपत। महिला एवं बाल विकास क्षेत्र में पिछले आठ साल की उपलब्धियों और योजनाओं की समीक्षा के लिए मंगलवार को सब जोनल बैठक आयोजित की गई। इसमें महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री कमलेश ढांडा ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 830 था, जो आज बढ़कर 920 हो गया है।
उन्होंने कहा कि पीसी-पीएनडीटी और एमपीटी एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करते हुए सरकार ने 1020 एफआईआर दर्ज कराया। वर्ष 2017 से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिला, दूध पिलाने वाली माता से लेकर नवजात बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए पहले बच्चे को कवर करके तीन किस्तों में पांच हजार रुपये की राशि देनी शुरू की थी। मुख्यमंत्री ने वित्तमंत्री के नाते वर्ष 2022-23 का जो बजट पेश किया, उसमें उन्होंने दूसरे बच्चे को भी इस योजना के माध्यम से कवर करने का एलान किया है। प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर (सखी) के माध्यम से पीड़ित महिला को चिकित्सा, परामर्श, सुरक्षा, पुलिस सहायता, कानूनी सलाह से लेकर आवासीय सुविधाएं दी जा रहीं हैं। अब तक 20 हजार 969 केसों का निपटारा किया जा चुका है।
महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से अब तक सात हजार 829 महिलाओं की समस्याओं का निवारण किया गया है। बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए प्रधानमंत्री पोषण अभियान महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। हरियाणा ने बच्चों के साथ-साथ महिलाओं, किशोरियों के पोषण को सुधारने में केंद्रीय योजना में अच्छा काम किया है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना शुरू की, जिसके माध्यम से प्रदेश में नौ लाख बच्चों और तीन लाख से अधिक महिलाओं को पौष्टिक और छह प्रकार के स्वाद का दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश में बीते दो साल में 4200 पोषण वाटिकाएं स्थापित की जा चुकी हैं। पोषण वाटिका में औषधीय, फलदार पौधे, हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कोराना महामारी में मां-बाप गंवा चुके बच्चों के लिए 29 मई 2021 को पीएम केयर्स फार चिल्ड्रेन योजना शुरू की थी। इसमें इसी साल 30 मई को राष्ट्रीय स्तर पर हुए आयोजन के माध्यम से इन बच्चों को 10 लाख रुपये राशि का बीमा और आयुष्मान भारत योजना जैसे लाभ के दायरे में लाने का कदम उठाया गया है। प्रदेश में 79 चाइल्ड केयर संस्थान सरकारी, गैर सरकारी व निजी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे हैं। इसमें वर्ष 2013 से अब तक 489 बच्चों को गोद दिया गया है। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन षोशण से बचाव और उनकी गरिमा के साथ काम करने के अधिकार के लिए सभी सरकारी विभागों, बोर्ड, निगमों में आंतरिक षिकायत समितियों का गठन किया जा चुका है।