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किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

Fri, 11 Oct 2013 12:19 AM IST
कैथ्ाल
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हरियाणा के जिले कैथल में अनाज मंडियों और खेतों में वीरवार दोपहर दोपहर बाद आई बरसात के कारण धान भीग गया। कैथल में गुहला-चीका इलाके में सबसे ज्यादा बारिश हुई।
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कैथल अनाज मंडी में भी हल्की बरसात के कारण खुले में पड़ा धान भीग गया। खेतों में पक कर लगभग तैयार हो चुके धान और काट दिए गए धान में भी इस बरसात से काफी नुकसान पहुंचेगा।

 कैथल अनाज मंडी में लाखों कट्टे खुले में पड़े हुए हैं। करीब 5 लाख से ज्यादा कट्टे पड़े हुए हैं। यहां मंडी में प्रति दिन 2 लाख कट्टों की आवक हो रही है।
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आढ़ती एसोसिशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार मित्तल ने कहा कि एकदम से आवक अधिक होने के कारण उठान नहीं हो रहा है। इस कारण मंडी में जाम की स्थिति हो गई है। इसके अलावा मंडी से बाहर जहां धान डाली जा रही है। वहां लाइटों की व्यवस्था नहीं हैं।

मार्केट कमेटी सचिव रविंद्र कुमार ने बताया कि प्रयास किया जा रहा है अधिक से अधिक उठान हो सके। वीरवार को हल्की बरसात हुई है।

इससे नुकसान नहीं होगा। लाइटों की समस्या पर उन्होंने कहा कि जहां-जहां पक्के में धान डाला जा रहा है, वहां व्यवस्था की गई है। जो लोग कच्चे में धान डाल रहे हैं, वहां बरसात से नुकसान होने की संभावना के चलते यह संभव नहीं है।


बेमौसमी बरसात ने बढ़ाई समस्या
गुहला-चीका। दोपहर बाद अचानक आई बेमौसमी बरसात से अनाज मंडी में पड़ा हजाराें क्व़िटल धान भीग गया है। इससे किसानाें को भारी आर्थिक नुकसान होगा। एक तरफ जहां खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान होने की संभावना है वहीं दूसरी तरफ मंडी में पड़े धान के भीगने से उसकी चिंताएं और भी ज्यादा बढ़ गई है। किसानाें की मांग है कि मार्के ट फीस के रूप में गुहला से प्रतिवर्ष 20 से 25 करोड़ रुपया सालाना सरकारी कोष को जाता है जबकि पुरानी अनाज मंडी में सिर्फ दो व अतिरिक्त अनाज मंडी में चार शेडों का निर्माण किया गया है जिनमें कुछ पैदावार का 20 प्रतिशत भी अंदर नहीं रखा जा सकता।

सुविधा नहीं मिलने से किसान परेशान
राजौंद। अनाज मंडी में सुविधा नहीं मिलने के कारण किसान परेशान हैं। मंडी में न तो किसानों के लिए पीने का पानी है, न बिजली है और ना ही बैठने के छाया है।

 किसान साहब सिंह, हरभजन सिंह, सिंद्र, हरविंद्र, रामपाल, किताब, जोगेंद्र सिंह ने बताया कि मंडी में जो शेड बनाए गए हैं उनमें अभी तक पिछले सीजन का अनाज पड़ा हुआ, जबकि इन शेडों का निर्माण किसानों के लिए फसल डालने के लिए किया गया है।

 इसके नीचे किसान विश्राम भी कर लेते थे, लेकिन यहां उठान न होने के कारण किसान अपनी कीमती फसलों को खुले आसमां के नीचे डालने को मजबूर हैं और किसानों को विश्राम के लिए भी कहीं छाया तक नसीब नहीं हो रही है।

मार्केट कमेटी पाई के सचिव धर्मसिंह ने कहा कि उन्होंने अभी ज्वाइन किया है। उन्हें इस बारे में नहीं पता था। अब जल्द ही इससे जुड़े कार्यालयों से जानकारी लेकर बहुत जल्द पेयजल व बिजली की आपूर्ति मंडी में शुरू करवा दी जाएगी।
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