पानीपत। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में वर्ष 2026 में राष्ट्रमंडल खेलों जहां टी-20 क्रिकेट समेत 16 खेलों को शामिल किया गया है वहीं निशानेबाजी, तीरंदाजी और कुश्ती को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इससे जिले के कुश्ती खिलाड़ी जहां निराश हैं वहीं उनमें नाराजगी भी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का कुश्ती में अच्छा रिकॉर्ड है। खिलाड़ी सबसे ज्यादा पदक जीतते हैं। कुश्ती और निशानेबाजी को शामिल नहीं किए जाने से भारतीय खिलाड़ियों को तो नुकसान होगा बल्कि पदक तालिका पर भी फर्क पड़ेगा। सभी वेट कैटेगरी में जिले के खिलाड़ियों के सबसे ज्यादा पदक रहते थे।
बोले खिलाड़ी
ग्रीको रोमन को पहले ही बाहर निकाल दिया था। अब कुश्ती को भी निकाल दिया। मेडल जीतने पर हरियाणा सरकार तीन करोड़ तक इनाम देती है। जिससे खिलाड़ी प्रोत्साहित होते थे और जिंदगी भर आसानी से अभ्यास कर पाते थे। सभी भार वर्गों में भारत के ही मेडल रहते थे। - नितेश सिवाच, कुश्ती खिलाड़ी
- ओलंपिक के बाद यह सबसे बड़ा खेल प्रतियोगिता मानी जाती है, जिसमें पदक लाना हर खिलाड़ी का सपना होता है। राष्ट्रमंडल खेल से कुश्ती को बाहर नहीं करना चाहिए। खिलाड़ी इस खेल के लिए चार पांच साल की मेहनत झोंक देते हैं। मैं भी 2022 राष्ट्रमंडल खेल की तैयारी कर रही हूं। - राधिका, कुश्ती खिलाड़ी
कुश्ती विश्व भर में मुख्य खेलों में से एक है। भारत के कुश्ती में सबसे ज्यादा पदक आते हैं, शायद इसीलिए इस खेल को बाहर किया जा रहा है। कुश्ती खेलने के लिए आधे से ज्यादा खिलाड़ी फिट रहते हैं और अपने शरीर का ध्यान रखते हैं।- सोनू जागलान, कुश्ती खिलाड़ी
भारत के लोकप्रिय खेल का अपमान किया जा रहा है। ओलंपिक से लेकर एशिया में कुश्ती खेल का अलग ही क्रेज हैं, विदेशों में भी कुश्ती खेल का क्रेज है। कोई भी खेल ओलंपिक या फिर राष्ट्रमंडल में आता है तो उसकी इज्जत बढ़ती है। - अनुज जागलान, कोच कुश्ती