बेटी के साथ मां रिंपी और पिता विकास शर्मा।
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पानीपत। बेटियों को बोझ समझा जाता रहा है लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। बेटियों के जन्म पर खुशियां मनाई जा रही है, जो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम को सार्थक बना रहा है। ऐसा ही पानीपत में हुआ जब एक परिवार ने पहली बेटी के जन्म पर अस्पताल से लेकर घर तक बैंड बाजे और फूलों से उसका स्वागत किया। ‘परी’ के अस्पताल से घर पहुंचने पर कॉलोनी में 170 किलो मिठाई बांटी और आतिशबाजी कर जमकर खुशी मनाई।
विकास नगर के शर्मा परिवार ने पहली बेटी होने की खुशी मनाने के साथ ही समाज को संदेश दिया। शर्मा परिवार में 10 जनवरी को बेटी हुई। बेटी होने के साथ ही परिवार ने उसके स्वगात की तैयारी शुरू कर दी। 13 जनवरी को जब बेटी की मां रिंपी शर्मा को डिस्चार्ज किया गया तो सलार गंज स्थित संजीवनी अस्पताल सलारगंज से लेकर विकास नगर तक बैंड बाजे के साथ बेटी का स्वागत किया गया। पांच किलोमीटर तक बैंड बाजे के साथ खुशी मनाई गई, पूरे रास्ते परिजन नाचते-गाते और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देते हुए घर पहुंचे। जहां घर को बेटी के स्वागत के लिए फूलों से सजाया गया था।
पिता विकास शर्मा ने बताया कि उनके घर में पहला बच्चा हुआ है। उनका कहना है कि उन्हें बहुत खुशी है कि उनके घर में लक्ष्मी के रूप में बेटी आई है। बेटी के होने पर लोग दुखी हो जाते हैं, लेकिन यह गलत है। बेटी के होने पर तो खुश होना चाहिए। बेटी बड़ी होकर एक घर को नहीं बल्कि दो घर को संभालती है।