पानीपत। अपनी लंबित मांगों को लेकर लगातार दूसरे दिन भी रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल जारी रखी। बसों के न चलने से दिन भर यात्रियों को यातायात को लेकर भारी परेशानी उठानी पड़ी। पानीपत डिपो से दिनभर में सिर्फ चार ही बसों का संचालन किया गया। ये किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई गई थी। इन हालात में किसी ने रेलवे स्टेशन की ओर रुख किया तो कोई प्राइवेट वाहनों को लेने के लिए बाध्य हुआ।
दूसरी ओर हड़ताली कर्मचारियों के लिए यूनियन की ओर से रागनी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कर्मचारियों ने डिपो में मंदिर के सामने इस कार्यक्रम का आनंद लिया और यहीं से अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उधर, रोडवेज कर्मचारी यूनियन संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कि सरकार आम जनता को परेशान देखकर ही खुश है। अगर ऐसा नहीं होता तो उनकी मांगों को मान लिया गया होता।
चार बजे निकाल रहे थे सरकारी बस, यूनियन ने रुकवाई
रोडवेज प्रबंधन की ओर से शाम चार बजे पानीपत बस डिपो से सरकारी बस को प्राइवेट चालक से चलवाने का प्रयास भी किया गया लेकिन जैसे ही बस गेट पर पहुंची, सभी कर्मचारी इसके विरोध में गेट के सामने खड़े हो गए। लगभग आधे घंटे विरोध करने के बाद कर्मचारियों ने बस को वापस डिपो में खड़ा करवाया। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन किलोमीटर स्कीम की बस चलवा ले लेकिन सरकारी बस को प्राइवेट चालकों से न चलवाए।
प्राइवेट बसों के चालान नो पार्किंग का किया चालान
बस डिपो के गेट पर प्राइवेट बस चालक सवारियों को अपनी बसों में भरते रहे। इसे देख ट्रैफिक पुलिस ने प्राइवेट बस चालकों के नो-पार्किंग के चालान कर दिए। डिपो के आसपास सवारियों को भरकर ले आने जाने वाली बसों के कागजात भी ट्रैफिक पुलिस ने चेक किए।
एक कैब में 12 से 15 सवारियों को बैठाया
कैब चालकों ने एक एक कैब में 12 से 15 लोगों को बैठाकर सफर करवाया। पानीपत से सैकड़ों कैब सवारियों को लेकर दिल्ली की ओर रवाना हुई। जिस इको कैब में केवल आठ सवारियां ही बैठ सकती हैं उसमें प्रावइेट वाहन चालक दोगुनी सवारियों को ठूंस रहे थे। यहां तक कि कुछ कैब संचालक ड्राइवर सीट पर भी एक सवारी को बैठाए नजर आए।
ट्रेन में सफर करने वाले 30 प्रतिशत यात्री बढ़े
बस न मिलने पर कुछ लोगों ने प्राइवेट बस का सहारा लिया तो कुछ लोगों ने एक दिन पहले ही ट्रेन की टिकट करवाकर ट्रेन में सफर किया। सबसे ज्यादा भीड़ दिल्ली की ओर आने जाने वाली रेलगाड़ियों में देखने को मिली। रात से लेकर दोपहर तक वाली पैसेंजर ट्रेन में भी काफी भीड़ देखी गई। स्टेशन अधीक्षक इंद्र पाल खोसला के मुताबिक सामान्य के मुुकाबले 30 प्रतिशत यात्री बढ़े दिखाई दिए।
70 वर्षीय बुजुर्ग होता रहा परेशान, दो घंटे बाद मिली बस
करनाल से आए 70 वर्षीय हरिचंद अपनी 65 साल की पत्नी निर्मती के साथ दोपहर 12 बजे कड़कड़ाती धूप में बस का इंतजार करते रहे। बस मिलने की उम्मीद से वे पहले करनाल से पानीपत आए। यहां आने के बाद भी उन्हें दो घंटे तक बस नहीं मिली। हरिचंद घुटने दर्द से परेशान हैं और चल नहीं में असमर्थ हैं। दो घंटे बाद बुजुर्ग दंपति को प्राइवेट बस मिली और वे दिल्ली जा सके।
बरसत गांव जाने के लिए एक घंटे से खड़ी हूं- इशवती
बरसत गांव जाने के लिए 45 वर्षीय इशवती एक घंटे तक परेशान होती रही। इशवती ने बताया कि उन्हें यह नहीं पता था कि हड़ताल है। वह हर महीने की तरह इस महीने भी अपने रिश्तेदार के घर जा रही थी। घंटे भर इंतजार करने के बाद इशवती को प्राइवेट बस में सफर करके ही जाना पड़ा।
इस हड़ताल ने परेशान कर दिया
पानीपत से सफीदों जाने वाली धनवंती काफी देर तक बस डिपो से बस का इंतजार करती रही। उनका कहना है कि इस हड़ताल ने तो आम जनता को परेशान कर दिया है। सरकार को यदि पहले ही पता था तो उनको तैयारी करके रखनी चाहिए थी। अब हम महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पानीपत। बस स्टैंड पर पानीपत से करनाल की तरफ जाने वाली सवारियो को ठूस कर बैठाते हुए।- फोटो : Panipat
पानीपत। बस स्टैंड के गेट पर नो पार्किंग में खड़ी बस चालक को समझाते हुए पुलिसकर्मी।- फोटो : Panipat