नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंधता, दृष्टि क्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 36वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाएगा। 2021 में अब तक विभाग ने 6 लोगों की मरणोपरांत आंखें एकत्रित कर रोहतक पीजीआई पहुंचाई जा चुकी हैं। सिविल अस्पताल में 700 संकल्प पत्र भरे जा चुके हैं। सिविल अस्पताल में नेत्र संग्रह केंद्र बनाया हुआ है। अस्पताल में 3 नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, स्वजन उसकी नेत्रदान करना चाहते हैं तो चिकित्सीय टीम मौके पर पहुंचकर आंखें एकत्रित करती है।
दूसरी ओर नेत्रदान के प्रति जिलेवासी अब जागरूक हो रहे हैं। पिछले 10 साल में लगभग एक हजार लोगों की मरणोपरांत आंखें दान की गई हैं। जन सेवा दल ने पिछले 6 साल में 625 मृतकों की आंखें दान कराने में मदद की हैं। इनसे दृष्टिहीन व्यक्तियों को रोशनी मिली है। हालांकि कोरोना काल में इसमें कमी भी आई है। पिछले 2 साल में सिर्फ 95 मृतकों की आंखों को जनसेवा दल और 10 लोगों की आंखें स्वास्थ्य विभाग ने दान कराई है।
30 प्रतिशत ही होते हैं कामयाब
कलेक्ट किए गए कॉर्निया में से मात्र 30 प्रतिशत ही कामयाब होते हैं। बहुत से लोग खास किस्म के संक्रमण, कैंसर, एचआईवी, सिफलिस, हैपेटाइटिस बी तथा हैपेटाइटिस सी और सेप्टिसेमिया जैसी बीमारियों से पीड़ित होते हैं। मृत्यु के समय तक उन्हें अपनी बीमारी का पता नहीं चलता। कॉर्निया लेने के बाद जब ब्लड जांच होती है तो बीमारियों का पता चलता है। ऐसे कॉर्निया तुरंत नष्ट किए जाते हैं।
जन सेवा दल द्वारा दान कराई गई आंखों का रिकॉर्ड
साल आंखें
2016 133
2017 143
2018 124
2019 120
2020 60
2021 35
इस तरह के कार्यक्रम होंगे
शिक्षण संस्थानों में सेमिनार और वेबिनार।
धर्म गुरुओं के माध्यम से लोगों को जागरूकता संदेश।
केबल आपरेटर्स के लिए नेत्रदान संबंधी प्रचार।
ब्लड सेंटर में जागरूकता कार्यक्रम।
खिलाड़ी, जनप्रतिनिधियों के जरिए समाज में संदेश।
इंटरनेट मीडिया के माध्यम से नेत्रदान के संदेश।
युवा संस्थाएं, रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी करेंगी जागरूक।
सरकारी-निजी अस्पतालों में जागरूकता कार्यक्रम।
धर्म गुरू, जनप्रतिनिधि, धार्मिक संस्थाएं, सेवाभावी संगठनों से जुड़े लोग नेत्रदान के प्रचार-प्रसार में सहायक और प्रेरणास्रोत हो सकते हैं। मृत्यु के बाद नेत्रदान जरूर करें। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति सिविल अस्पताल में पहुंचकर, निर्धारित फार्म भर सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति की मृत्यु के 6 घंटे के भीतर ही कार्निया लिया जा सकता है।
डॉ. शशि गर्ग, जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ