पानीपत। जिले का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है। दिवाली पर पटाखों के धुएं से शहर की हवा जहरीली हो गई। स्मॉग से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। शहरी आंखों में हो रही जलन से परेशान है। शनिवार को एक्यूूआई 337 दर्ज किया गया। डॉक्टर लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो बिना काम के घरों से बाहर न निकलें और मास्क का प्रयोग जरूर करें।
शहर के लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर का कारण प्रशासन की लापरवाही ही है। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी ने 10 दिन पहले ग्रेडिड रिस्पोंस एक्शन प्लान लागू कर इसके तहत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जब प्रशासन ने सख्ती से ग्रैप के तहत काम नहीं किया तो सीपीसीबी ने एचएसपीसीबी को प्रदूषण फैलाने वाले स्त्रोतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए और हर रोज कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी। सीपीसीबी ने 10 दिन में मास्टर प्लान रिपोर्ट मांगी है, लेकिन प्रशासन की रिपोर्ट सिर्फ कागजों में तैयार होती है। पिछले एक माह में प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी इंडस्ट्री पर कार्रवाई नहीं हुई है।
स्मॉग के कारण बढ़ी आई ओपीडी
स्मॉक के कारण लोगों को आंखों में जलन हो रही है। एलर्जी के मरीजों की संख्या बहुत अधिक बढ़ चुकी है। अब सिविल अस्पताल में नेत्र रोगियों की ओपीडी 100 पार हो चुकी है। इनमें से अधिकतर बच्चे ही हैं।
किसी भी विभाग ने नहीं निभाई जिम्मेदारी
नगर निगम को शहर के अंदर सड़कों के किनारे, पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे के किनारे व एएनएचआई को जीटी रोड पर सड़कों के किनारे पानी के छिड़काव का काम सौंपा गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। किसी भी सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। हवा में धूल के कणों के कारण ही शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है।
यहां जारी की थी पाबंदी
ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेटर सेट पर पाबंदी के निर्देश दिए गए थे। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी। इन निर्देशों का भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
प्रशासन को ये करना है
1. सड़क निर्माण, स्ट्रॉम वाटर, ड्रेनेज और सीवरेज लाइन निर्माण में पर्यावरण नियमों का पालन करवाना।
2. रबड़ प्लास्टिक और कपड़ा आदि कचरे को जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।
3. कचरा जलाने और बायोमास जलाने वालों को रोकने के लिए टीमों का गठन करना।
4. ठोस कचरा ले जाने वाले वाहनों को पर्याप्त रूप से कवर करवाना।
5. रात के समय में नियमों की अवहेलना पर अंकुश लगाना।
6. नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाने विभिन्न स्थानों पर पड़े कचरे और मलबे को उठाने की एक्टिविटी।
7. सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगाना।
8. अनाधिकृत निर्माण गतिविधियों को रोकना शामिल है।
पानीपत देश का 11 वें नंबर का सबसे प्रदूषित शहर
एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पानीपत प्रदेश का दूसरा और देश का 11 वें नंबर का सबसे प्रदूषित शहर है। पानीपत में अवैध रूप से 5 हजार से अधिक फैक्टरियां चल रही हैं। हर रोज यहां से 80 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। साथ ही डाई हाउस में चप्पल व जूते जलाए जाते हैं।
अपनी रिपोर्ट सीपीसीबी को देंगे : आरओ
ग्रैप के तहत एएनएआई, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, पुलिस को मिलकर काम करना है। सबकी अलग-अलग जिम्मेदारी है। वे प्रदूषण फैलाने वाले श्रोतों को चिह्नित कर रिपोर्ट डीसी को दे रहे हैं। प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी। वो अपनी एक्शन की रिपोर्ट सीपीसीबी को सौंप देंगे।
-कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड