पानीपत। कहते हैं कि जहां चाह होती है वहीं राह होती है। ऐसा ही कुछ गांव डिडवाड़ी के शक्ति सिंह आर्या ने साबित करके दिखाया है। उन्हें आईपीएस बनना था और इसे हासिल ही लिया। पिछले वर्ष 587 रैंक के साथ आईआरएस में चुने गए थे, लेकिन असिस्टेंट कमिश्नर के तौर पर अपनी नौकरी के साथ कड़ी मेहनत की और फिर से परीक्षा दी। इस बार बेहतर प्रदर्शन करते हुए 480वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बने।
गांव डिडवाडी के शक्ति सिंह आर्य का पिछले आईआरएस में चयन हुआ तो उन्हें मनचाही सफलता नहीं मिली। उन्हें निराशा थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आईआरएस की नौकरी ज्वाइन की। इस वक्त नागपुर में इनकम टैक्स विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। इस पद पर रहते हुए सिविल सेवा की फिर से तैयारी की और अबकी उन्हें मेहनत का फल मिला। शक्ति आईआरएस की नौकरी से पहले सीआईएसएफ के जवान भी रह चुके हैं। उनके पिता राजबीर सिंह पोस्टमास्टर हैं। माता सुनीता गृहिणी हैं और परिवार में दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुुकी है। शक्ति ने गांव की चौपाल से अपनी पढ़ाई की शुरुआत की और 12वीं मॉडल संस्कृति विद्यालय से पास की है।