पानीपत। महिला पानीपत थ्रो बाल टीम राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में लगातार स्वर्ण पदक जीत रही है। शिवाजी स्टेडियम में रविवार को हुए फाइनल में टीम की कप्तान चोटिल हो गईं। टीम लगातार दो राउंड हार गई। इसके बावजूद टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
फाइनल मैच के अंतिम पड़ाव में कप्तान प्रियंका के चोटिल होने पर टीम बिखरी नहीं। वापसी की और मैच अपने नाम किया। टीम ने फाइनल मैच में छह फाउल से डीएन स्पोर्ट्स अकादमी को 2-1 से हराया। टीम की खिलाड़ी प्रियंका, पूजा, नीमा, सविता, स्नेहा, सोनिया, राज नंदनी, शांति ने मिलकर मैच में वापसी की और स्वर्ण अपने नाम किया। पानीपत की टीम 13 साल में जितने भी राज्य स्तरीय मैच खेलने गई है, कभी हारकर नहीं लौटी। टीम हर बार स्वर्ण पदक लेकर आई है। टीम की खिलाड़ियों का कहना है कि लगभग 15 साल पहले पानीपत की टीम ने थ्रो बाल खेलना शुरू किया था। तब टीम में ज्यादा अच्छे खिलाड़ी नहीं थे। इसके बाद कोच राजेश तुरण और अन्य कोच ने मिलकर खिलाड़ियों को खेलना सिखाया। जिससे उनकी टीम आज हर साल पदक जीतकर ला रही है। संवाद
लगातार छह बार जीत चुकी है नेशनल में गोल्ड, सातवें की तैयारी
पानीपत महिला थ्रो बाल की टीम केवल राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पिछले छह साल से नेशनल में भी गोल्ड मेडल जीत रही है। कप्तान प्रियंका का कहना है कि अब उनका लक्ष्य सातवां नेशनल गोल्ड है। इसके आद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की कोशिश करेंगी।
घोड़ा बुग्गी चलाकर पिता ने खिलाई थ्रो बाल
महिला थ्रो बाल टीम की कप्तान प्रियंका के पिता जयपाल महला ने घोड़ा बुग्गी चलाकर बेटी को थ्रो बाल खिलाई। गांव के सरकारी स्कूल में लड़कियों को खेलता देख प्रियंका ने भी अपने पिता से खेलने की इच्छा जाहिर की। जिसके बाद उसके पिता ने खेलने के स्टेडियम भेजा। प्रियंका का कहना है कि उनको पता था कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, इसके बाद उसके पिता ने खेलने से मना नहीं किया। वहीं खेल कोटा से ही प्रियंका की डीसी ऑफिस में सरकारी नौकरी लग गई। इसके बाद से उसकी घर की आर्थिक स्थिति ठीक हुई।
हारते हुए मैच को जीतना जानती है महिला थ्रो बाल की टीम
पानीपत महिला थ्रो बाल की टीम हारते हुए मैच को भी अच्छी तरह से जीतना जानती है। रविवार को भी हारते हुए मैच को भी अपनी जीत में पलटकर लगातार 13वीं बार गोल्ड मेडल जीता। टीम में कप्तान के चोटिल होने के बाद भी खिलाड़ियों ने सूझबूझ से खेला।
-राजेश तुरण, कोच थ्रो बाल टीम