विभाग के अधिकारियों ने पुलिस की स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट से पानीपत के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के मामले की जांच कराई। पुलिस की विशेष टीम ने 35 गाड़ियों को जांच में शामिल किया। जिसमें सामने आया कि कुछ एजेंटों दलालों और अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर इन गाड़ियों के फर्जी नंबर प्लेट जारी की है।
पानीपत एसडीएम कार्यालय में वाहनों की नंबर प्लेट में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने एजेंट व दलालों के साथ मिलकर वाहनों की फर्जी नंबर प्लेट जारी कर दी। इसमें चेसी नंबर और इंजन नंबर में अंतर दिखा कर यह फर्जीवाड़ा किया है।परिवहन विभाग ने 2021 में जगाधरी यमुनानगर में नंबर प्लेट के मामले में पकड़े फर्जीवाड़े के बाद विशेष जांच कराने पर यह मामला पकड़ में आया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर पानीपत के थाना शहर पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
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जांच के बाद हुआ मामले का खुलासा
विभाग के अधिकारियों ने पुलिस की स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट से पानीपत के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के मामले की जांच कराई। पुलिस की विशेष टीम ने 35 गाड़ियों को जांच में शामिल किया। जिसमें सामने आया कि कुछ एजेंटों दलालों और अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर इन गाड़ियों के फर्जी नंबर प्लेट जारी की है। कई वाहनों के दूसरे नंबर तो कई के वही नंबर जारी कर दिए गए। जांच अधिकारी एसआई विजेंदर सिंह ने बताया कि अभी कई अन्य मामलों की जांच चल रही है। इनमें भी इस तरह की शिकायत हैं।
वाहन चालकों से पूछताछ के साथ वाहनों की फिजिकल जांच की
परिवहन आयुक्त के आदेश पर 35 गाड़ियों की नंबर प्लेट की जांच की। इनके मालिकों के साथ गाड़ियों की फिजिकल वेरीफिकेशन की गई। इसमें पानीपत, फरीदाबाद, झज्जर, गुरुग्राम व कैथल के लोगों के नाम वाहनों का रजिस्ट्रेशन है।
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जांच में एजेंट, दलालों व कर्मचारियों की सेटिंग आई
अधिकारियों ने साफ कहा कि कर्मचारियों की संलिप्तता के बिना इस तरह का फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता। इसमें अर्जेंट व दलालों ने अधिकारियों में कर्मचारियों के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। मामला सामने आने के बाद एसडीएम कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने चुप्पी साध ली है