दलालों के काम जल्दी होने से लोग परेशान।
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नगर निगम की संपत्ति कर शाखा में दलालों की आवाजाही एक बार फिर शुरू हो गई है। दलाल फिर से पूरा दिन संपत्ति कर शाखा में आईडी की फाइलें लिए घूमते रहते हैं। निगम कर्मी भी लालच में पहले दलालों का काम करते हैं। दलालों पर रोक लगाने के लिए निगम में लगाया गया सीसीटीवी मॉनिटरिंग सिस्टम भी फेल हो चुका है।
दलालों और निगम कर्मचारियों की इस मिलीभगत का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। बुधवार को भी शहर के लोगों ने संपत्ति कर शाखा में हंगामा मचाया। लोगों ने आरोप लगाया कि निगम कर्मचारी दलालों की फाइलें तो चंद मिनटों में पास कर देते हैं। वहीं आम आदमी की फाइल पर नियम कानून बता देते हैं। आम आदमी को तब तक परेशान किया जाता है जब तक वह थक कर निगम कर्मियों या उनके बंधे हुए दलालों को पैसे देकर काम न करवाएं। इससे परेशान शहर के लोगों के पास निगम को शिकायत करने से लेकर आरटीआई तक लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
वहीं अधिकारियों ने कहा कि निगम में दलाली के चलने की वजह से वे भी परेशान हैं। इसके लिए उन्होंने निगम आयुक्त से भी विचार विमर्श किया है। अब जल्द ही इस पर नई रणनीति से काम किया जाएगा। इसकी तैयारियां शुरू की जाएंगी। जिसमें मेन एंट्री गेट पर रजिस्टर लगाया जाएगा। जिसमें टैक्स ब्रांच में आने जाने वालों का नाम दर्ज किया जाएगा और बाहर सुरक्षा कर्मी भी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा आयुक्त के निर्देशानुसार बेहतर कार्रवाई की योजना है।
केस नंबर एक
वार्ड नंबर 3 के सुधीर नगर निवासी नरेेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले अपनी संपत्ति की आईडी की फाइल निगम में जमा करवाई थी। जिसे निगम कर्मचारियों ने गुम कर दिया। लगातार दो महीने से निगम कार्यालय के रोजाना चक्कर काटे जा रहे हैं। जिस कर्मचारी ने फाइल रिसीव की थी वह अब कह रहे हैं कि जब उनके पास टाइम होगा तब वे उनकी फाइल ढूंढेंगे। निगम कर्मचारियों की जिनके साथ सेटिंग है वे हाथों हाथ फाइल लेकर आते हैं और संपत्ति आईडी बनवा ले जाते हैं। आम आदमी को सिर्फ दिक्कते मिलती हैं। इसकी शिकायत निगम उप आयुक्त को की गई। वहीं, पूरे मामले की आरटीआई भी लगा दी है।
केस नंबर दो
वार्ड नंबर 16 के सूरज ने बताया कि उन्हें अपनी संपत्ति में नाम और वर्ग गज बदलवाना है। उनके सभी दस्तावेज सही हैं। इसके बाद भी उनको मौके पर सत्यापन करवाने के लिए कहा जाता है। उन्होंने बताया कि वे इसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन कोई चलकर मौका देखे तो सही। इसके लिए निगम अधिकारियों या कर्मचारियों के पास समय नहीं है। ज्यादा सवाल जवाब करने पर निगम कर्मी फाइल तक दूर फेंक देते हैं। इनकी शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं बनती।
नगर निगम दलालों पर रोक लगाने के लिए नई रणनीति इख्तियार करने जा रहा है। इस बारे में आयुक्त से विचार विमर्श किया जाएगा। जिसमें नए प्रावधानों के साथ कार्रवाई की जाएगी। आम आदमी को सुविधा देने के लिए निगम हर संभव कोशिश करेगा। -जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।