आशा वर्कर यूनियन ने वीरवार को सिविल अस्पताल परिसर में मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ रोष जताया। एक घंटा प्रदर्शन करने के बाद जब सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान ज्ञापन लेने प्रदर्शन स्थल पर नहीं गए तो करीब 100 आशा वर्कर्स उनके कार्यालय पर पहुंच गई। यहां पर उन्होंने नारेबाजी कर रोष जताया। सीटू नेता सुनील दत्त ने सिविल सर्जन पर आशा वर्कर के प्रदर्शन को अनदेखा करने का आरोप भी लगाया। कार्यालय के बाहर प्रदर्शन होते देख सिविल सर्जन बाहर आए और आशा वर्कर को शांत किया। आशा वर्कर ने अपनी मांगों को लेकर सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपा।
आशा वर्कर्स यूनियन की महासचिव सुनीता ने बताया कि सरकार ने एनएचएम में कार्यरत सभी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का तोहफा दिया है । यह सराहनीय काम है, लेकिन इस परियोजना में कार्यरत आशा वर्कर को इस घोषणा में अनदेखा किया गया है, जबकि आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है । तमाम योजनाओं को लोगों तक आशा वर्कर ही लेकर जाती है। कोरोना काल में आशा वर्करों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए काम किया है। कोरोना के संक्रमित मरीजों को चिह्नित कर उन्हें आइसोलेट करने, उन तक दवाई पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । कोरोना रोधी टीकाकरण अभियान के दौरान भी आशा वर्कर का योगदान सराहनीय रहा है। आशा वर्कर ही लोगों को टीकाकरण के लिए केंद्रों पर लेकर गई है। इसके बाद भी आशा वर्कर को सरकार अनदेखा कर रही है। सरकार ने कोरोना रोधी गतिविधियों के लिए आशा वर्कर को 1000 अतिरिक्त मानदेय दिया था, लेकिन सरकार ने सितंबर 2021 के बाद इसको बंद कर दिया। उनकी मांग है कि इसको एक अक्तूबर से दोबारा बढ़ाया जाए आशा वर्कर को अतिरिक्त 5000 प्रोत्साहन राशि देने की जो घोषणा की गई थी। उसको अब तक लागू नहीं किया गया है। उनकी मांग है कि इसे जल्द लागू किया जाए। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान ने आशा वर्कर को आश्वासन दिया है कि उनके मांग पत्र को जल्द एनएचएम निदेशक तक पहुंचा दिया जाएगा।