पानीपत। प्रशासन के साथ मिलीभगत से प्राइवेट बस चालक बिना परमिट के यूपी व बिहार तक बस चला रहे हैं। लोगों से मनमाफिक किराया भी वसूल रहे हैं। बसों में कोरोना के नियमों का पालन नहीं हो रहा। ये पूरा खेल बस स्टैंड व दो पुलिस थानों के सामने चल रहा है। प्राइवेट बसों के मालिक सरकारी बसों व ट्रेन के अभाव का फायदा उठा रहे हैं, क्योंकि अब तक नियमित रूप से ट्रेन व सरकारी बसें नहीं चल रहीं। लोगों को मजबूरन निजी बसों में सफर करना पड़ रहा है।
बिना स्टॉपेज के 18 घंटे में तय करवाते हैं 750 किलोमीटर का सफर-
घर जाने वाले इन लोगों ने बताया कि रोजाना पानीपत से करीब 10 बसें यूपी की तरफ रवाना होती हैं। ये बस पानीपत बस स्टैंड के सामने फ्लाईओवर, संजय चौक के सामने और एसडी कॉलेज के सामने फ्लाईओवर के नीचे से भरती हैं। इसके अलावा कच्चा कैंप से भी बसें जाती हैं। इनमें ज्यादातर बसें यूपी के गोंडा और सीतापुर जिले की ओर जाती हैं। करीब 750 किलोमीटर का ये सफर ये बस करीब 14 से 18 घंटे में तय करती हैं।
इन बसों में खचाखच सवारियों से भरा जाता है। बीच में कोई स्टॉपेज तक नहीं दिया जाता। एक बार बस के अंदर घुस गए तो बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। हमारी मजबूरी को सब पूरा फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन बसों की कोई चेकिंग नहीं होती है। बस संचालक पुलिस, आरटीए या रोडवेज की पूरी जिम्मेदारी लेने का नाम लेकर ही उनसे अवैध तौर पर किराया वसूलते हैं।
सारी बसें यूपी की, प्रशासन की आंखों में झोंक रहे धूल
खास बात ये है कि ये सारी बसें यूपी नंबर की प्राइवेट बसें हैं। इनके पास इतनी सवारियों को भरकर ले जाने का परमिट तक नहीं है। ये बसें खुलेआम जीटी रोड से भरी जाती हैं लेकिन इन पर कोई नकेल कसने वाला नहीं है। ये काम दो सालों से चल रहा है। कोरोना की गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इन पर न ट्रैफिक पुलिस कोई कार्रवाई करती है और न आरटीए या रोडवेज। इससे ट्रांसपोर्ट विभाग को भी लाखों करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। इन लोगों का कहना है कि ये सारा अवैध कारोबार या तो प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है या प्रशासन की आंखों में दिन दहाड़े धूल झोंक कर चलाया जा रहा है।
रोडवेज ने किया था 15 बसों को चलाने का दावा
हरियाणा रोडवेज प्रबंधन की ओर से यूपी की ओर 15 बसों को चलाने का दावा किया गया था। इनमें गोंडा जिले की कई बसों को शामिल करने की बात भी की गई थी लेकिन इन बसों को चलाया नहीं गया। ऐसे में इन लोगों को मजबूरी में इन बसों की जानलेवा यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
ऐसी बसों के पहले भी कई बार चालान किए गए हैं। अबकी बार फिर से इन बसों को पकड़कर इनके चालान किए जाएंगे। अगर इनके पास अधूरे दस्तोवज मिले तो इनको इंपाउंड भी किया जाएगा।
इंस्पेक्टर राकेश शर्मा, सह सचिव, आरटीए, पानीपत।