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487 पहुंचा पीएम- 10 एक्यूआई रेड जोन में बरकरार

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शहर का प्रदूषण स्तर 2 नवंबर से ही रेड जोन में ही। दिवाली पर प्रदूषण स्तर और बढ़ गया था। अब तक खेतों में चल रहे काम, भवन निर्माण एवं नहरों पर चल रहे काम के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक जस का तस बना हुआ है। शहर का पीएम-10 शुक्रवार को 487 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम-2.5 का स्तर 236 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है। इसके अलावा वायु गुणवत्ता सूचकांक 396 अंक पाया गया। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिना काम घर से बाहर न निकले और मास्क का प्रयोग करें।
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शहर की जहरीली हो रही हवा के खिलाफ प्रशासन की ओर से सख्ती से काम नहीं हो रहा है। ग्रैप के तहत प्रशासन ने सिर्फ पानी के छिड़काव के अलावा कोई काम नहीं किया है। पानी का छिड़काव भी महज शुक्रवार को किया गया था। शहर के हालात ये हैं कि सुबह 10 बजे तक स्मॉग के कारण विजिबिलिटी मात्र 500 मीटर रहती है। शाम को पांच बजे के बाद दोबारा स्मॉग की चादर बिछ जाती है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और आंखों में जलन महसूस होती है।
पराली जलाने की घटनाओं पर नहीं लगा अंकुश
इस सीजन में कृषि विभाग ने उन 94 जगहों को चिह्नित किया है, जहां आग जलती मिली। 54 जगहों पर खेतों में आगजनी होते पाई गई। कृषि विभाग ने किसानों पर सवा लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। बावजूद इसके पुराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पाया।
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सुप्रीम कोर्ट ने ईंट भट्ठों व हॉट मिक्स प्लांट पर लगाई पाबंदी-
इस बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने मौसम विभाग के हवाले से कहा है कि अगले 5 दिनों में प्रदूषण और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए बोर्ड ने हरियाणा सरकार को पौधों के साथ उन सड़कों पर भी पानी का छिड़काव करने को कहा है, जहां धूल उड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दिल्ली-एनसीआर में ईंट-भट्ठे, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर पर पूरी तरह पाबंदी सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए हैं।
पिछले एक सप्ताह का एक्यूआई-
6 नवंबर- 337
7 नवंबर- 405
8 नवंबर- 398
9 नवंबर- 386
10 नवंबर- 425
11 नवंबर - 396
12 नवंबर- 396
वर्जन
ये खेतों में काम का सीजन है। धूल के कारण एक्यूआई बढ़ रहा है। उद्योगों की भी मॉनिटरिंग की जा रही है। ग्रैप के कारण काम किए जा रहे हैं। उम्मीद है अगले सप्ताह से बढ़ते प्रदूषण स्तर से राहत मिलेगी।
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- कमलजीत सिंह, आरओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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