पानीपत। रोज घटते भूजल को बरसाती पानी से रिचार्ज करने के लिए शासन, प्रशासन और निगम ने शहर में जल संचय के एक बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी है। इसके जरिए करीब 91.59 करोड़ लीटर साफ बरसाती पानी से भूजल को रिचार्ज किया जाएगा। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक पानीपत शहर में रोज करीब 9.98 करोड़ जल दोहन हो रहा है। आने वाले समय में भीषण जलसंकट पैदा हो सकता है।
पानीपत अर्बन इंटीग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट मिशन (पीयूआईडब्ल्यूएमएम) प्रोजेेक्ट के तहत निगम प्रशासन ने जल दोहन, जनसंख्या, सप्लाई, बारिश समेत सभी घटकों की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भी भेज दी है। इसे स्वीकृति मिलने के बाद इस पर काम शुरू किया जा चुका है। इसके लिए निगम वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तो लगाएगा ही साथ में घरों की छत से बरसाती पानी को पाइपों के जरिए जमीन में पहुंचाया जाएगा। सरकार लोगों को इसमें भागीदारी दर्ज करवाने की अपील कर रही है। आगे आने वाले प्लान में इस पर भी विचार किया जा सकता है कि घरों का नक्शा तभी पास होगा, जबकि छतों से बारिश का पानी जमीन में पहुंचाने को लोग राजी होंगे।
प्रोजेक्ट में इस तरह इकट्ठा किया जाएगा 91.59 करोड़ लीटर पानी
शहर की जनंसख्या करीब 7.39 लाख है और प्रॉपर्टी करीब 1.45 लाख हैं। पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार शहर में प्रति व्यक्ति को 135 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस हिसाब से रोजाना 9.98 करोड़ लीटर पानी का दोहन किया जा रहा है। बरसात के मौसम में औसतन 31 दिन तक हुई बारिश करीब 680 एमएम होती है और नगर निगम के अंतर्गत करीब 1.45 लाख प्रॉपर्टी आती हैं। एक छत का एरिया औसतन 9.29 वर्ग मीटर लगाएं तो इस जगह औसत बारिश करीब 68 एमएम हुई। इस एरिया को शहर और पूरे बरसाती सीजन के पानी से गुणा भाग करें तो इसमें 91.59 करोड़ लीटर पानी केवल छतों से इकट्ठा होगा। जिसे छत से लेकर जमीन तक पहुंचाने के लिए पाइप लगाकर वाटर लेवल को रिचार्ज किया जा सकता है।
इन तकनीकी घटकों पर काम करेगी निगम की टीम
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत निगम टीम जियोमॉर्फोलॉजी, हाइड्रोलॉजी, ग्रांउड वाटर क्वालिटी, ग्रांउड वाटर रिसोर्सेस, नीड ऑफ मिशन और सबसे मुख्य रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत काम करेगी। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत तत्कालीन निगम आयुक्त वत्सल वशिष्ठ ने की थी। इसके तहत निगम ने पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा को तैयार कर लिया है। निगम अधिकारियों के अनुसार योजना पर काफी कम खर्च में काफी पानी की बचत हो सकती है।
ऐसे लगाए जाएंगे सिस्टम, इतना आएगा खर्च
शहर में प्रदेश में सबसे ज्यादा पानी का दोहन हो रहा है। यहां पानी की खपत बढ़ती ही जा रही है जबकि जमीनी पानी घट रहा है। इस योजना के अनुरूप छतों पर बरसने वाले बरसाती पानी को पाइप के माध्यम से बोरवेल में छोड़ दिया जाएगा, जिससे वाटर लेवल रिचार्ज होगा। एक बोरवेल मे 3-4 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। वहीं, निगम पहले बंद हुए बोरवेल की तलाश कर रहा है, जिससे ये खर्च भी बच जाएगा। बाकी केवल पाइप लगाने का खर्च ही रहता है।
दस दिन का मिलेगा बैकअप- छौक्कर
निगम ने ताऊ देवी लाल कॉम्प्लेक्स समेत पालिका बाजार में इसे लगवा दिया है। अब पहले सरकारी इमारतों पर इस प्रोजेक्ट को लगाया जाएगा। इसके बाद लोगों से भी इसे लगवाने की अपील की जाएगी। इससे शहर में जलभराव भी नहीं होगा और ग्राउंड वाटर लेवल भी रिचार्ज होगा। जितना पानी शहर में रोजाना जमीन से निकाला जा रहा है, उसके मुकाबले दस गुना पानी को वापस जमीन में छोड़ वाटर लेवल को रिचार्ज किया जाएगा।
- अजय छौक्कर, कनिष्ठ अभियंता, नगर निगम, पानीपत।