शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से कहा कि रविवार को पंजाब कैबिनेट लगभग आधे राज्य में बीएसएफ की तैनाती को रोकने के बारे में स्पष्ट फैसला ले, साथ ही तीनों कृषि कानूनों को रद्द के लिए कार्रवाई करे। शनिवार को पार्टी की कोर कमेटी की मीटिंग में मांग की गई कि पंजाब सरकार अधिकारियों को निर्देश दें कि वे राज्य में केंद्रीय फैसले को लागू करने की अनुमति न दें, क्योंकि यह भारत के संविधान में राज्य के फैसले के अंतर्गत आता है।
चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार इस दोनों मुद्दों पर विधानसभा प्रस्ताव पेश कर पंजाब के लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि उनकी ही सरकार, राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मुद्दों पर केंद्रीय आदेशों को रोकने के लिए पूरी तरह से सशक्त है। कृषि और कानून राज्य के विषय हैं। ये प्रशासनिक मामले हैं और विधानसभा का इनसे कोई लेना देना नहीं है।
अकाली दल कोर कमेटी के एक संकल्प में कहा गया कि विधानसभा संकल्प महान इरादे की अभिव्यक्ति है, लेकिन यहां मुद्दा इरादे का नहीं, बल्कि वास्तविक है। वे एक प्रस्ताव के लिए विधानसभा सत्र क्यों ला रहे हैं? क्या विधानसभा पंजाब सरकार को बीएसएफ और कृषि कानूनों को रोकने के कार्यकारी आदेश पारित करने से रोक रही है? सुखबीर ने कहा कि मुख्यमंत्री चन्नी नौटंकी कर रहे हैं। उन्हें लोगों को बताना चाहिए कि उन्होंने अपने प्रशासन को बीएसएफ की तैनाती और कृषि कानूनों को रोकने का आदेश क्यों नही दिया?
कोर कमेटी की कार्यवाही का ब्योरा देते हुए अकाली दल अध्यक्ष के प्रमुख सलाहकार हरचरण बैंस ने कहा कि अकाली दल ने जम्मू और कश्मीर आतंकवाद निरोधक कानून के प्रावधानों को पंजाब तक पहुंचाने के लिए भी भारत सरकार के फैसले की निंदा की। अकाली दल ने कांग्रेस सरकार से इस संबंध में केंद्र के फैसले के खिलाफ अपने रुख पर सफाई देने को कहा है।