चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा गेहूं और धान के बीच बचे समय में मूंग उगाने के सुझाव को सूबे के किसानों का भरपूर समर्थन मिला है। यह संकेत धान की किस्म पीआर-126 के बीजों की तेजी की बढ़ी बिक्री से मिले हैं, जोकि 55 दिन की मूंग की फसल लेने के बाद किसानों से धान की सीधी बुआई के तौर पर लगाने को कहा गया है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लालचंद कटारूचक ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा धान की सीधी बुआई और दो फसलों के बीच मूंग की फसल प्राप्त करने की जो सलाह किसानों को दी गई थी, उस पर किसानों को अमल भी शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समय मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 7275 रुपये प्रति क्विंटल केंद्र सरकार की ओर से घोषित है और मुख्यमंत्री मान पहले ही एलान कर चुके हैं कि किसानों से मूंग की फसल एमएसपी पर खरीदी जाएगी।
इस बीच, रविवार को मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर मूंग उगाने के पांच बड़े फायदे भी गिनाए। उन्होंने लिखा- विशेषज्ञ भी मानते हैं कि पंजाब सरकार का फैसला ऐतिहासिक है, जिसके पांच बड़े फायदे होंगे- पहला किसानों को गेहूं-धान के साथ-साथ तीसरी फसल (मूंगी) पर एमएसपी मिलेगी। दूसरा धरती के निचले पानी की कमी दूर होगी, तीसरा धान की बुआई के समय बिजली की समस्या दूर होगी। चौथा जुलाई में बारिश वाला मौसम होने के कारण बासमती लगाने का खर्च घटेगा और पांचवां पंजाब दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में मुख्य तौर पर धान और गेहूं की ही खेती होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि यह दोनों फसलें सरकार एमएसपी पर खरीदती है लेकिन धान की अत्याधिक खेती के कारण प्रदेश का भूजल स्तर चिंताजनक स्थिति तक गिर चुका है। अब राज्य सरकार ने किसानों को फसल विविधता की ओर मोड़ने के उद्देश्य से, सबसे पहले मूंगी की पैदावार की तरफ मोड़ने का प्रयास शुरू किया है। यह प्रयोग सफल रहने के बाद राज्य सरकार बाजरा, मक्का और सूरजमुखी भी एमएसपी पर खरीदेगी।
पंजाब में दलहन उत्पादन बहुत कम
पंजाब में सरकार ने मूंग की फसल एमएसपी पर खरीदने का जिम्मा मार्कफेड को सौंपा है। विभाग के अनुसार इस समय राज्य में दलहन की पैदावार मात्र 29 हजार टन है और यह 30 हजार एकड़ में उगाई जाती हैं। वहीं, सूबे में दलहन की खपत 3 से 3.50 लाख है, जिसके लिए अन्य राज्यों और विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। दूसरी ओर, गेहूं और धान के मामले में वर्ष 2021-22 के दौरान 187 लाख टन धान पंजाब से खरीदा गया जबकि 2022-23 के रबी सीजन के लिए 1 मई तक 89 लाख टन गेहूं खरीदा गया है।