डिजिटल इंडिया के साथ डिजिटल हरियाणा के दावे जरूर किए जा रहे हैं, जो केवल हवा साबित हो रहे हैं। हकीकत कुछ और है। प्रदेश के आबकारी, शिक्षा, खजाना एवं लेखा, राजस्व, जनस्वास्थ्य आदि विभागों में स्थायी आईटी प्रोफेशनल्स ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, पिछले कई साल से इन कर्मचारियों की न तो कोई पदोन्नति हुई और न ही विभागों के ढांचे में कोई सुधार किया गया है। आईटी प्रोफेशनल्स ने तमाम समस्याओं को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
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पांच हजार से अधिक कर्मचारी
कर्मचारियों ने कहा है कि हरियाणा के ज्यादातर विभाग अब ऑनलाइन काम कर रहे हैं। इन विभागों में करीब 5 हजार से अधिक आईटी कर्मचारी हैं। अधिकतर विभागों में ठेके पर कर्मचारी रखे गए हैं, उनको पूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी तो बढ़ गई है, लेकिन कई साल से न तो उनकी पदोन्नति के लिए कोई पॉलिसी बनाई गई है और न ही विभाग की कार्यप्रणाली मुख्यधारा में आ रही है।
प्रमोशन देने के बजाय बना दिया क्लर्क
कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष 2014 में सरकार ने कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रमोशन देने के बजाय क्लर्क बना दिया। दूसरा अधिकतर विभागों में ठेके पर कर्मचारी रखे गए हैं, उनको पक्का किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों को लेकर वे कई बार उच्च अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिलता है। उनकी मांग है कि आईटी प्रोफेसनल्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाई जाए और उनकी मांगों को पूरा किया जाए।
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इसमें कोई दो राय नहीं है कि पहले के मुकाबले विभागों ने ऑनलाइन प्रक्रिया तेज की है। इसके पीछे तमाम आईटी प्रोफेसनल्स की मेहनत है। सरकार को चाहिए कि वह सभी विभागों में स्थायी नियुक्ति करे और इनके पदोन्नति के रास्तों समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराए। संघ इनकी मांगों का समर्थन करता है।
-सुभाष लांबा, अध्यक्ष, सर्व कर्मचारी संघ