पंजाब में 295 किलो हेरोइन वितरण में मुख्य भूमिका निभाने का है आरोप
नशा समाज पर डाल रहा बुरा प्रभाव, ऐसे कृत्य के आरोपी रहम के हकदार नहीं : हाईकोर्ट
नशे के सिंडीकेट में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप, जमानत जांच को करेगी प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। समुद्री मार्ग से पाकिस्तान से गुजरात आई 500 किलो हेरोइन की तस्करी के आरोपियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपियों की व्यापक प्रभाव वाले ड्रग सिंडिकेट में संलिप्तता दिखाई दे रही है। नशा समाज पर बुरा प्रभाव डाल रहा है और याचिकाकर्ताओं पर प्रदेश में 295 किलो नशा वितरित करने का आरोप है, ऐसे में इस कृत्य के आरोपी रहम के हकदार नहीं हैं।
कुलदीप और मलकियत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए एसटीएफ मोहाली द्वारा 29 जनवरी, 2020 को दर्ज एफआईआर में जमानत की मांग की थी। इस मामले को बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया था। याची पक्ष ने दलील दी कि उन्हें फरवरी 2020 को गिरफ्तार किया गाय था, लेकिन उनके पास से नशे की कोई बरामदगी नहीं हुई थी। मुकदमा बेहद धीमी गति से चल रहा है और निकट भविष्य में ट्रायल समाप्त होने की संभावना नहीं है।
एनआईए ने अमृतसर की विशेष अदालत से केस फाइलों को एनआईए कोर्ट अहमदाबाद में स्थानांतरित करने के लिए एक स्थानांतरण याचिका दायर की है। यह याचिका फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। याची ने कहा कि उन्हें अनिश्चित काल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता है। जमानत का विरोध करते हुए एनआईए ने हाईकोर्ट को बताया कि 2018 में अहमदाबाद (गुजरात) में एटीएस ने एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया था। इसमें समुद्री मार्ग से पाकिस्तान से गुजरात में 500 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी की साजिश रची गई थी। पाकिस्तानी नागरिकों ने हेरोइन का परिवहन किया, जिसे बाद में एक भारतीय जहाज में स्थानांतरित कर दिया गया। पाकिस्तान से भेजी गई हेरोइन की खेप पंजाब के लिए थी। यह सह-आरोपी सिमरनजीत सिंह संधू उर्फ सिमर के कहने पर भेजी गई थी, जिसे इंटरपोल नोटिस के आधार पर इटली में हिरासत में लिया गया था।
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अपराधों की गंभीर प्रकृति और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एनआईए द्वारा एकत्र किए गए पर्याप्त सबूतों को देखते हुए, यह कोर्ट उन्हें जमानत में छूट देना उचित नहीं समझता। याचिकाकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब भर में 295 किलोग्राम हेरोइन के परिवहन और वितरण में मदद की। कुछ बयानों और बाद की जांच सहित रिकाॅर्ड पर मौजूद सामग्री बड़े आपराधिक उद्यम में उनकी संलिप्तता की व्यापक तस्वीर पेश करती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।