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Panchkula News: मंजूरी के अभाव में नौकरशाहों के खिलाफ नहीं हो पा रही कार्रवाई, केंद्र से जवाब तलब

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चंडीगढ़। पंजाब में नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन व जांच की मंजूरी के अभाव में मामले विचाराधीन होने की दलील देते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब कर लिया है। याचिका में केंद्र सरकार की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया को इसका कारण बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी सरबजीत सिंह वेरका ने बताया कि केंद्र सरकार ने पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ अभियोजन व जांच की मंजूरी को लेकर 3 सितंबर, 2021 को सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र भेजा था। इस पत्र के माध्यम से अभियोजन व जांच की मंजूरी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। इस पत्र के बाद विजिलेंस विभाग ने मुख्य सचिव के माध्यम से सभी विभागों के प्रशासनिक सचिवों को इस बारे में जानकारी दी थी।
याची ने बताया कि उसने आरटीआई के माध्यम से 2018 से अभी तक के ऐसे मामलों की जानकारी मांगी थी जो अभियोजन की मंजूरी न मिलने के चलते लंबित हैं। इस बारे में जानकारी दी गई कि 45 मामलों में अभियोजन से जुड़ी मंजूरी न मिलने के चलते इन्हें सिरे नहीं चढ़ाया जा सका। 27 मामले ऐसे हैं जहां पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन अभी तक अभियोजन की मंजूरी नहीं दी गई है। इसके अतिरिक्त 18 मामले ऐसे हैं जहां मंजूरी न मिलने के चलते जांच अभी लंबित है। एक समाचार पत्र की खबर का हवाला देते हुए बताया कि पंजाब में पब्लिक सर्वेंट व नेताओं के खिलाफ 100 से अधिक ऐसे मामले हैं, जहां अभी तक संबंधित विभागों से मंजूरी का इंतजार है।
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पंजाब सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से लंबित 45 मामलों में से 10 पर निर्णय लिया जा चुका है। 6 मामलों में मंजूरी देने से इन्कार किया गया है, जबकि चार मामलों में अनुमति दी जा चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न राज्यों के ऐसे ही मामलों को लेकर केस विचाराधीन है। ऐसे में बाकी के मामलों में मंजूरी को लेकर उन्हें जवाब की मोहलत दी जाए। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 26 जुलाई तक स्थगित कर दी है।
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