चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और सूबे के राइस मिलरों की समस्याओं का सामधान करने का आग्रह किया, ताकि प्रदेश में धान की खरीद व उठान का काम सुचारु रूप से जारी रह सके। मान राइस मिलरों के साथ दिल्ली जाकर इस मसले को लेकर गृहमंत्री से मुलाकात भी करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बैठक में समाधान निकलने की उम्मीद है, क्योंकि मिलरों की अधिकतर मांगें केंद्र से संबंधित हैं, जबकि पंजाब सरकार उनकी सभी मांगें पूरी कर चुकी है। मान ने बताया कि उन्होंने धान की निर्विघन खरीद के लिए गृहमंत्री के दखल की मांग की है। साथ ही धान की खरीद को लेकर सामने आ रही समस्याओं से उनको अवगत करवाया है। मान ने गृहमंत्री को बताया कि परिवहन लागत, भंडारण की कमी, हाइब्रिड किस्म की गुणवत्ता और शेलर मालिकों के घाटे जैसी समस्याओं का खरीद प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान, आढ़तियों और मिल मालिक देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ की हड्डी हैं। हमारे किसान अनाज उगाते हैं जबकि आढ़ती और मिल मालिक यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी खरीद, भंडारण और उठान सही तरीके से की जाए। मान ने कहा कि इस साल राज्य में 185 लाख मीट्रिक टन धान आने की उम्मीद है, लेकिन केंद्रीय पूल के तहत पिछली बार की 120 मीट्रिक टन धान का उठान नहीं हुआ है, जिसने मिलरों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र को इस जगह को खाली करने के लिए तेजी लानी चाहिए ताकि मिलिंग शुरू हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलरों के अधिकतर मुद्दे जैसे धान का भंडारण, ड्रेनेज और परिवहन केंद्र सरकार से संबंधित हैं, जिसके कारण उठान प्रक्रिया धीमी है। उन्होंने पहले ही इन मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। अब 23 अक्तूबर को केंद्रीय गृह मंत्री के साथ नई दिल्ली में मिल मालिकों की बैठक होनी है। केंद्र सरकार को मिल मालिकों की जायज मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए, ताकि खरीद प्रक्रिया को सुचारु रूप से अंजाम दिया जा सके। धान की कटाई के बाद गेहूं का सीजन भी आने वाला है, इसलिए देश के व्यापक हित में इस मुद्दे का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए।
कहा- ग्रामीण विकास फंड का पैसा जारी करे
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को राज्य का ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) का बकाया हिस्सा तुरंत जारी करना चाहिए। पंजाब सरकार इस संबंध में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर चुकी है और अब केंद्र को यह पैसा जारी करना चाहिए। हम इस मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए हुए हैं।