चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पीर मुछल्ला के रॉयल अपार्टमेंट प्रीमियम में अलाटमेंट के बाद सैकड़ों फ्लैट किसी अन्य बिल्डर को बेचने के मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण पल्ली व जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई पर बहस के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव, डीजीपी, सीबीआई और इंडियन ओवरसीज बैंक की तरफ से पक्ष रखा गया। बिल्डर व सरकारी अधिकारियों की सांठगांठ के मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को इस मामले में सुनवाई करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रभावित सभी लोगों को रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के पास भी जाने की सलाह दी थी। इस मामले में याची पंचकूला निवासी ललित गुप्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसने व अन्य ने साल 2011 से अपनी जमा पूंजी लगाकर प्रोजेक्ट राॅयल अपार्टमेंट में फ्लैट लिया था, जो कागजों में उसे अलाॅट भी है।
इस बीच रॉयल अपार्टमेंट के निदेशक बैंक डिफाॅल्टर हो गए व प्रोजेक्ट को बैंक ने अपने अधीन कर लिया। इस बीच उसकी व अन्य की याचिका पर कोर्ट व मानवाधिकार आयोग ने पंजाब सरकार को इस मामले में उचित कदम उठाने के आदेश दिया था। 2019 को मोहाली के उपायुक्त की अध्यक्षता में पांच मेंबर वाली फ्लैट अलाॅटमेंट समाधान कमेटी बनी और मामले की विजिलेंस जांच शुरू हुई। 2021 में प्रोजेक्ट रॉयल अपार्टमेंट प्रीमियम (गर्ग रियलिटी इंफ्रा प्रमोटर एलएलपी, पीरमुछल्ला) ने अवैध ढंग से साल 2011 के 112 फ्लैट में से तकरीबन 100 बिके हुए फ्लैट हथियाने के लिए झूठे शपथ पत्र, गलत दस्तावेज देकर अलाॅटियों की सहमति पत्र लिए बिना किसी अन्य बिल्डर को बेच दिए। इस मामले में अधिकारियों ने उनका साथ दिया। न्याय के लिए उन्होंने सरकार को हर स्तर पर लिखा, लेकिन न्याय न मिलने के कारण सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी थी।