सेवा, सुरक्षा व सहयोग का नारा लगाने वाली पंचकूला पुलिस के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। शनिवार को पंचकूला के जनरल अस्पताल में हुई वारदात के बाद पंचकूला पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
शनिवार को जहां पुलिस की मौजूदगी में अपराधियों ने अपने मंसूबों को अंजाम दिया है। वहीं करीब चार हजार मरीजों का इलाज के लिए आना जाना रहता है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले चार हजार लोग परिसर में चौकी होने के बावजूद असुरक्षित हैं। इतनी बड़ी चूक पुलिस से कैसे हुई कि अस्पताल परिसर में अपराधी बंदूक लहराते हुए अपने साथी कैदी को कई नाके पार कर आसानी से फरार हो गए। पेश है एक रिपोर्ट।
टाइम लाइन
1.सुबह 11.15 पर सेक्टर-17 का राज्य चौकसी ब्यूरो नाका पर मात्र एक पुलिस कमी। पेड़ की छांव में सड़क की तरफ पीठ कर आराम से बैठा।
2.सुबह 11.29 पर हाउसिंग बोर्ड पर पंचकूला सेक्टर-7 की तरफ नाके पर एक भी पुलिस कर्मी नजर नहीं आया। वहां पर एक टेंट में एक पुलिस कर्मी आराम करता दिखाई दिया।
3. दोपहर एक बजे सेक्टर-6 स्थित जिला अस्पताल के पास, जहां रोजाना वन वे रोड कर पुलिस कर्मी तैनात रहता था। शनिवार को वहां कोई नजर नहीं था।
4. दिन में डेढ़ बजे पंचकूला से ढिल्लों बैरियर तक कोई पुलिस कर्मी नजर नहीं आया। बता दें कि यहां पर हर समय एक पीसीआर खड़ी दिखाई देती है। लेकिन शनिवार को वह भी नदारद थी।
5.दिन में 1.18 पर एमडीसी सेक्टर-5 से मनीमाजरा जाने वाले मार्ग पर बाइक पर तीन सवारी बिना हेलमेट मार्ग से निकल रही थी। लेकिन कोई पुलिस कर्मी नजर नहीं आया।
6. दिन 1.32 पर एमडीसी से आईटी पार्क चंडीगढ़ जाने वाले मार्ग स्थित नाके पर कोई पुलिस कर्मी नजर नहीं आया।
7. दिन में 2.05 बजे पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया फेज दो से चंडीगढ़ जाने वाले मार्ग पर एक पीसीआर तो दिखाई दी। लेकिन उसमें कोई भी नहीं था।
8. 2.15 बजे इंडस्ट्रियल एरिया फेज दो से पंजाब के हरमिलाप नगर जाने वाले नाके पर कोई पुलिस कर्मी नजर नहीं आया।