कांस्टेबल राकेश ने खाली हाथ अपराधियों को पकड़ने की कई बार कोशिश की। लेकिन पूरी तैयारी के साथ पहुंचे अपराधी पुलिस से एक कदम आगे रहे। हथियारबंद बदमाशों ने कैदी दीपक को भगाने के लिए फायरिंग भी की।
बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थल में रोजाना पहुंचने वाले सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के नाम पर यहां महज सीसीटीवी कैमरे हैं। सुरक्षा कर्मी अगर तैनात भी होते हैं तो उनके पास ऐसी किसी भी वारदात से निपटने के लिए कोई हथियार नहीं हैं। सिविल अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। पिछले दिनों नर्स के साथ मारपीट की घटना हुई। अस्पताल में मेटल डिटेक्टर या मेटलिक डोर फ्रेम भी नहीं है, जिससे किसी संदिग्ध हथियार के साथ दाखिल होने वाले का भी सुराग मिल सके।
सीएमओ वीके बंसल ने दावा किया कि सुरक्षा में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि फरार होने वाले कैदी को पकड़ने के लिए पुलिस कर्मियों के साथ साथ नर्स भी थीं। लेकिन स्प्रे से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण सभी बेबस हो गए। इस वारदात में पुलिस कर्मी राकेश, रोशन और सुखदेव के चेहरे का हिस्सा बुरी तरह चपेट में आया है। उन्हें आंखों में देखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कांस्टेबल राकेश और बदमाशों के बीच दो से तीन बार हुए संघर्ष में उनके शरीर के अलग अलग हिस्से में गुम चोटें आई हैं।
राकेश ने बताया कि जब आरोपियों ने उनके साथ मारपीट शुरू की तो उन्होंने डटकर मुकाबला किया। फायरिंग के बाद जब आरोपी भागने लगे तो अस्पताल परिसर में खड़ी एक पजेरो के मालिक को भी रास्ता रोकने को कहा, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। इसके बाद भी राकेश ने हार नहीं मानी और पीछा करने का प्रयास किया।
नाकों पर नहीं होती है आर्म्स की चेकिंग
सेक्टर-20 से गन प्वाइंट पर कार समेत बच्चे को अगवा करने का मामला और मीत मर्डर सहित अस्पताल में सरेआम गोलियां चलाकर कैदी के फरार होने में यह बात सामने आई है कि नाकों पर आर्म्स की चेकिंग नहीं होती है। अगर पहले ही चेकिंग हो जाए तो ऐसी वारदात पहले ही रोकी जा सकती हैं।