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मंडियों से दूर हो रहा कपास, 4.15 लाख क्विंटल ही पहुंची फसल

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इस सत्र में पंजाब की मंडियों से कपास की आवक कम दर्ज की गई है। अब तक मंडियों में सिर्फ 4.15 लाख क्विंटल कपास की आवक हुई है, जबकि 2020 में इस समय तक 7 लाख क्विंटल फसल मंडियों में पहुंची थी। विशेषज्ञ इसके पीछे का कारण फसल में इस बार लाल सुंडी का प्रकोप और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के मूल्यों में अत्यधिक वृद्धि को बता रहे हैं। इस सीजन में कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5925 रुपये तय किया गया है।
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फसल की आवक कम होने के कारण वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार सहित स्थानीय बाजार में भी 8300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। काटन कारपोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार अब तक सूबे की मंडियों में केवल 3.75 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई है। जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि के दौरान 7 लाख क्विंटल खरीदा गया था। विशेषज्ञों ने आवक में गिरावट के लिए बाजार में कपास की कीमतों में और तेजी आने की किसानों की आशंका को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही फसल के देर से आने के लिए लाल सुंडी के हमले को भी जिम्मेदार ठहराया है।
सीसीआई के अनुसार किसान अब फसल को बेचने से पहले बाजार के रुझानों का अध्ययन कर रहे हैं। फसल की पैदावार पहले के मुकाबले कम होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसानों को कपास के मूल्यों में तेजी की आशंका है, जिस कारण किसान मंडियों की ओर रुख नहीं कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की मांग बढ़ने के बाद इसकी कीमत बढ़ गई और निजी कंपनियों ने इसे एमएसपी से ज्यादा रेट पर खरीदना शुरू कर दिया।
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2020 में हुई रिकार्ड खरीद
पिछले खरीद सत्र के दौरान राज्य में पैदा हुई कुल कपास की 50 प्रतिशत की रिकॉर्ड खरीद की गई थी। इसके बाद भी सीसीआई ने इस साल बाजार में कपास की खरीद नहीं की। सीसीआई के अधिकारियों के मुताबिक इसके पीछे का कारण निजी खरीददार पहले से ही एमएसपी से अधिक कीमतों पर कपास खरीद कर रहे हैं।
400 क्विंटल तक ही आ रही फसल
2020 में मंडियों में रोजाना 1000-1500 क्विंटल से अधिक की बिक्री हुई। इस बार आवक घटकर 250-400 क्विंटल रह गई है। कपास की गुणवत्ता पिछले सीजन की तुलना में उतनी अच्छी नहीं है, फिर भी खरीददार उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर हैं।
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