चंडीगढ़। आईएसबीटी-43 पर मंगलवार को एक निजी बस के कारिदों ने पंजाब रोडवेज की वोल्वो बस से जबरन सवारियां उतारकर अपने बस में भरनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर रोडवेज कंडक्टर के साथ हाथापाई की। सूचना पाकर पंजाब के परिवहन मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग तत्काल मौके पर पहुंचे और निजी कंपनी की बस को जब्त करवाकर गुंडागर्दी कर रहे जुझार ट्रांसपोर्ट कंपनी के दो मुलाजिमों को पुलिस के हवाले कर दिया।
बता दें कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की रोक के बावजूद शहर में धड़ल्ले से निजी बसें घूम रही हैं। यही नहीं निजी बस संचालक गुंडागर्दी तक कर रहे हैं। परिवहन मंत्री राजा वड़िंग ने बताया कि श्री चंडीगढ़ से गंगानगर वाया लुधियाना-मोगा-श्री मुक्तसर साहिब पनबस डीपो की दो वोल्वो सुपर इंटेरगल बसें चलाईं जा रही हैं। इनमें से एक बस (नंबर पीबी 04 एए-7439) को चालक अवतार सिंह चला रहा था। सेक्टर-43 बस अड्डे पर तय समय दोपहर 2.05 बजे वापसी रूट लुधियाना-श्री मुक्तसर साहिब के लिए बस जब रवाना होने लगी तो जुझार ट्रांसपोर्ट कंपनी के अड्डा इंचार्ज मनजीत सिंह और ठेकेदार राजवीर सिंह ने गुंडागर्दी करते हुए बस रुकवा ली और सवारियों को उतार दिया। इतना ही नहीं विरोध करने पर कंडक्टर से हाथापाई की। इस बीच चालक ने उन्हें फोन कर मामले की जानकारी दी। सूचना पाकर वह तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस बुलाई। उन्होंने जुझार ट्रांसपोर्ट कंपनी की बस को जब्त करने के लिए पुलिस से कहा और गुंडागर्दी कर रहे मुलाजिमों को पुलिस के हवाले करवाया। वड़िंग के कहने पर पीड़ित कंडक्टर ने पुलिस को शिकायत दी है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।
शहर के अंदर घूम रहीं बसें, सो रहे अफसर
सिर्फ आईएसबीटी पर ही नहीं, निजी बसें शहर के अंदर से भी सवारियों को बैठा रही हैं। आरोप है कि अधिकारियों और निजी संचालकों की सांठगांठ से ही ऐसा हो रहा है। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि निजी बसें शहर के अंदर घुस जाएं, क्योंकि सख्ती बेहद ज्यादा थी लेकिन अब मिलीभगत से खुलेआम निजी बस संचालक, आम लोगों को लूट रहे हैं। धनास, सेक्टर-56 समेत कई इलाकों में रोजाना निजी बसें खड़ी रहती हैं। लोगों को ठूंस-ठूंस कर उसमें भरा जा रहा है और मनमाना किराया वसूला जा रहा है लेकिन अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
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हाईकोर्ट की रोक के बावजूद कैसे चल रही हैं निजी बसें
आईएसबीटी पर निजी बसों के खिलाफ हम वर्ष 2018 से केस लड़ रहे हैं। वर्ष 2012 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी बसें शहर में नहीं चल सकतीं। हाईकोर्ट ने उनके परमिट रद्द कर दिए थे। फिर ये निजी बसें किसकी शह की वजह से चल रही हैं। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और इनके खिलाफ परिवहन सचिव व निदेशक को भी शिकायत दी है।
- धर्मेंद्र राही, प्रधान, सीटीयू वर्कर्स यूनियन (चंडीगढ़)
आईएसबीटी-43 पर घंटों खड़ी रहती हैं निजी बसें
सरकारी बसों का काउंटर समय तय है। बसें तीन से पांच मिनट तक ही खड़ी रह सकती हैं, लेकिन निजी बसें आईएसबीटी-43 पर घंटों खड़ी रहती हैं। उनका कोई तय समय नहीं है। एक बस के साथ एक ड्राइवर और कंडक्टर की जरूरत होती है, लेकिन निजी बसों के साथ 10 से 15 लोग आते हैं। बस स्टैंड पर पूरी तरह से गुंडागर्दी की जा रही है। प्रशासन को इस पर ध्यान रखना चाहिए।
- मलकीत सिंह, इंचार्ज, बस अड्डा-43
जबरन यात्रियों को बैठाते हैं, सरकारी बसें जाती हैं खाली
सारा विवाद श्री मुक्तसर साहिब जाने वाली बस को लेकर हुआ। कोविड के बाद ये बस पहली बार लोगों के लिए चलाई गई तो निजी बस संचालकों ने बस को रोक दिया और जबरन सवारियों को पंजाब रोडवेज की बस से निकाल कर अपनी बस में बैठाने लगे। वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। ये निजी संचालक जबरन लोगों को अपनी बस में बैठाते हैं, जिसकी वजह से निजी बस खाली जाते हैं।
- राजबीर सिंह, पंजाब रोडवेज डिपो इंचार्ज, आईएसबीटी-43