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जश्न : कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा पर चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसानों ने डाला भंगड़ा

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पिंजौर। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद किसानों में खुशी की लहर है। शुक्रवार को चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसानों ने मुंह मीठा कराकर एक दूसरे को बधाई दी। उन्होंने इसे किसानों की एकजुटता के साथ लोकतंत्र की जीत बताया। हालांकि किसान नेताओं का दावा है कि जब तक संसद में कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर दिया जाता तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। पंचकूला शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसान करीब एक साल से कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरिंद्र सिंह, ब्लॉक प्रधान गुरजंट सिंह सहित पूर्व ब्लॉक प्रधान कर्म सिंह की अगुवाई में किसानों ने टोल प्लॉजा पर जबरदस्त आंदोलन चलाया।
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इस दौरान किसानों ने टोल से गुजरने वाले बीजेपी नेताओं का विरोध का उन्हें काले झंडे भी दिखाए और शहर में रैलियां भी निकालीं। आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधानसभा स्पीकर सहित अन्य बीजेपी नेताओं के पिंजौर आने के दौरान विरोध के मद्देनजर किसानों को पुलिस हिरासत में भी लिया गया। शुक्रवार को टोल प्लॉजा पर प्रधान नरिंद्र सिंह, ब्लॉक प्रधान गुरजंट सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रधान करम सिंह, गुरमेल सिंह गेला, गुरभाग सिंह धमाला, भीम सिंह, गुरदास सरपंच अलीपुर, गुरमुख सिंह सकेतड़ी, हरभजन सिंह खेड़ा, दिला सिंह खेड़ा, कुलदीप सिंह सूरजपुर, दिलबारी मानकपुर, लाल सिंह, राजिंद्र कौर सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
क्या कहना है किसान नेताओं का
यह किसानों की एकजुटता, लोकतंत्र और आंदोलन के दौरान शहीद किसान भाइयों की जीत है। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपनी घोषणा के दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के संबंध में कुछ नहीं कहा है। किसान भाइयों पर केस दर्ज किए गए, हड्डियां तक तोड़ दी गईं, माताओं, बहनों, बुजुर्गों पर लाठीचार्ज भी किया गया। पिंजौर, कालका, पंचकूला हमारे में 15 साल तक के युवाओं पर भी लाठीचार्ज किया गया। प्रशासन ने चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर तो सबसे ज्यादा कहर ढाया। आंदोलन के दौरान तंबुओं में बैठे किसानों को भी पुलिस ने उठाकर हिरासत में लिया। विरोध करने के हमारे मौलिक अधिकारों का भी हनन कर करीब 12 सौ पर मामले दर्ज किए गए। कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद अब हमारा देेश और किसान बच जाएगा। हालांकि जब तक संयुक्त किसान मोर्चा का कोई आदेश नहीं आता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। - नरिंद्र सिंह जिला प्रधान भाकियू।
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हमारे लोकतंत्र का जो कत्ल हो रहा था उस लोकतंत्र को बचाने में हमारी जीत हुई है। जब भी देश के लोकतंत्र पर किसी तरह का खतरा आएगा तो किसान और मजदूर एकता इसी प्रकार से डट कर विरोध करेगी। चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर चल रहे आंदोलन को सफल बनाने में पिंजौर ब्लॉक के हर समाज के लोगों सहित ग्रामीणों, पंच, सरपंच, मजदूर सहित सभी लोगों का पूरा सहयोग रहा इसके लिए वे सभी का आभार व्यक्त करते हैं। - गुरजंट सिंह, ब्लॉक प्रधान, पिंजौर
जब तक बीजेपी सरकार इन कानूनों को संसद में वापस नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कानून बनाया और उसे वापस लेने की घोषण करने से किसानों के हालात नहीं सुधरेंगे। किसानों के हालात पहले भी खराब थे। किसानों की हालात सुधारने के लिए एमएसपी पर कानून बनने के साथ-साथ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए। - कर्म सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रधान भाकियू।
कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा लोकतंत्र की जीत है। जब भी किसानों के हितों पर किसी तरह आंच आएगी किसान एकजुट होकर उसका विरोध करेंगे, चाहें कोई भी कितना भी प्रभावशाली हो। - गुरभाग सिंह धमाला, किसान।
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