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बढ़ रहे पराली जलाने के मामले: नोडल अधिकारियों की तय करें जिम्मेदारी, आयोग के पंजाब व हरियाणा को निर्देश

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चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां तक कि एक-दो दिन से मामलों में बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने इसका संज्ञान लिया है और नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को पराली प्रबंधन में असफल रहने वाले नोडल अधिकारी व स्टेशन हाउस ऑफिसर के खिलाफ मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत व केस फाइल करने के लिए अधिकृत किया जाता है। साथ ही सभी राज्यों को पराली जलाने के मामले को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं। चारों राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेशों की कॉपी भेज दी गई है।
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पिछले कुछ दिन से पराली जलाने के मामले में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने के मामले में अधिक वृद्धि देखने को मिली है। इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि 8 अक्तूबर को पंजाब में पराली जलाने के 8 मामले हैं, जो 9 को बढ़कर 33, 10 को 123 और 11 को 143 तक पहुंच गए। इस तरह मामलों में अचानक बढ़ोतरी ने राज्य सरकारों के साथ ही आयोग की भी चिंता बढ़ा दी है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि सभी राज्यों में जागरूकता मुहिम चलाई जानी चाहिए और समय पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि निगरानी बढ़ाई जा सके। इसके अलावा कहा गया है कि जहां कहीं भी पराली जलाने का मामला सामने आता है तो संबंधित जगह पर चेकिंग की जानी चाहिए और स्टैंडर्ड इसरो प्रोटोकॉल के बाद रेवन्यू रिकाॅर्ड में रेड एंट्री करने की प्रक्रिया भी पूरी की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर को कहा था कि आयोग को पराली जलाने को रोकने के लिए कदम उठाने में अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है। यह देखते हुए कि आयोग ने पराली जलाने वालों के खिलाफ सीएक्यूएम अधिनियम की धारा 14 के तहत कभी भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि धारा 14 के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो पराली जलाने के खिलाफ निषेधाज्ञा केवल कागजों पर रह जाएगी।
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पराली जलाने में पंजाब सबसे आगे :
पराली जलाने के मामले में पंजाब इस समय टॉप पर चल रहा है। शुरुआत में पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के कम मामले आए, लेकिन अब इन मामलों ने रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि आयोग ने भी इन मामलों को देखते हुए सख्ती करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी हाल ही में इसे लेकर एक बैठक की थी, ताकि अधिकारी पराली जलाने की रोकथाम के लिए अधिक सख्ती करें। इसी तरह 18 व 19 सितंबर को भी डीसी के साथ एक बैठक की गई थी।
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