कैप्टन ने कहा कि माकन ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की लगातार दो बड़ी पराजयों में अहम भूमिका निभाई थी। जिस व्यक्ति ने दिल्ली में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया कर दिया है, अब उसे पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में कोई भी राज्य में पार्टी के भविष्य का अंदाजा लगा सकता है।
दिल्ली में 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए कोई भी सीट सुनिश्चित न करने वाले व्यक्ति को अब पंजाब में भेजा गया है, ताकि यहां भी उसी प्राप्ति को हासिल किया जा सके। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी ने चुनाव से पहले हार को स्वीकार कर लिया है, जिसने एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया है, जो 2014 और 2019 में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव हार चुका है और विधानसभा में अपनी जमानत भी नहीं बचा सका।
शिअद ने भी जताई आपत्ति
शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि गांधी परिवार 1984 के सिख कत्लेआम के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ नेताओं के परिजनों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर तुला है। कांग्रेस ने सिख समुदाय को एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि वह पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी उम्मीदवारों के टिकटों के आवंटन के लिए पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में अजय माकन को नियुक्त कर ऐसे तत्वों को संरक्षण देना जारी रखेंगे।
मजीठिया ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एक तरफ वरिष्ठ नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ अदालत में आरोप तय किए जा रहे हैं, वहीं गांधी परिवार ने ललित माकन के परिवार को पुरस्कृत करने के लिए चुना है, जिन्होंने उस भीड़ की अगुवाई की थी। इससे पता चलता है कि गांधी परिवार और कांग्रेस आलाकमान को सिखों और उनकी भावनाओं का कितना ख्याल है।
उन्होंने कहा कि पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने सिखों के खिलाफ हिंसा करने के जिम्मेदार 277 व्यक्तियों को नामित किया था, जिसमें ललित माकन का नाम तीसरे नंबर पर था। यह निस्संदेह साबित करता है कि 1984 में सिखों की हत्या करने वाले नेताओं को बार-बार शीर्ष पदों पर पुरस्कृत करना गांधी परिवार की नीति है।