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अपील : ‘मंदिरों के पदाधिकारी फरमान की जगह सुविधाएं देने पर दें ध्यान’, मनसा देवी मंदिर की सचिव द्वारा छोटे कपड़े पहनकर आने पर पाबंदी के निर्णय पर लोगों ने दी प्रतिक्रिया

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कालका। माता मनसा देवी मंदिर में छोटे कपड़े और जींस पहनकर आने पर पाबंदी लगाने का फरमान तूल पकड़ता जा रहा है। हालांकि इस मामले में श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड के प्रशासक एवं उपायुक्त विनय प्रताप सिंह स्पष्ट कर दिया है कि उक्त विचार बोर्ड सचिव के निजी हैं। बोर्ड ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है। इसके बावजूद लोगों ने इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि इस तरह के तुगलकी फरमान जारी नहीं करनी चाहिए। मंदिर में सर ढकने के आदेश होने चाहिए। उधर कुछ का कहना है कि पहनावे की जगह सुविधाओं की तरफ ध्यान दिया जाए तो बेहतर होगा। उधर काली माता मंदिर के सचिव पृथ्वीराज का कहना है कि काली माता मंदिर में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है, भविष्य में भी इस तरह की कोई पाबंदी लगाने की योजना भी नहीं है।
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श्री माता मनसा देवी में जींस या छोटे कपड़े पहनकर आने पर पाबंदी का फरमान अनुचित है। मनसा देवी मंदिर एक एतिहासिक मंदिर है जो लगभग 1815 में बनाया गया था। सितंबर 1991 से श्राइन बोर्ड के अधीन है। यदि सच्ची श्रद्धा हो तो मंदिर में जींस या छोटे-बड़े कपड़े पहन कर जाने से कोई फर्क नही पड़ता है। जो इसे गलत समझते हैं, उन लोगों को इन कपड़ों में अपने बच्चों को देखना चाहिए। अपनी सोच को बदलें यदि श्राइन बोर्ड कुछ ऐसा करना चाहता है तो मंदिरों में सब को सिर ढकने के आदेश दें। - सुरेंद्र चौहान, समाज सेवी
माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड के सचिव के फैसले से वे सहमत हैं। धार्मिक स्थल की मर्यादा होती है। इसलिए श्रद्धालुओं को शालीनता के साथ मंदिर में दर्शन करने चाहिए। पूजा स्थलों पर इस प्रकार के वस्त्र शोभा नही देते। - मनमोहन तिवारी, पुरबिया परिवार अध्यक्ष
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मंदिर सचिव को श्रद्धालुओं के कपड़ों की जगह मंदिर में दी जाने वाले सुविधाओं की तरफ ध्यान देना चाहिए। सचिव को मंदिर में किसी भी तरह की पाबंदी लगाने का कोई अधिकारी नहीं है। मंदिर में मर्यादा का ध्यान रखने के लिए पोस्टर अथवा बैनर के माध्यम से जागरूक कर सकते हैं लेकिन पूर्ण पाबंदी का कोई औचित्य नहीं है। काली माता मंदिर में जूता घर में कोई व्यक्ति नही है, मंदिर में बीते दिन लाइट न होने के चलते टार्च जलाकर लोगों ने पूजा की इस तरफ किसी का काई ध्यान नहीं है। - नरेश धीमान, कालका निवासी
मंदिर में मर्यादा का पालन होना चाहिए। यह फैसला बच्चोें को संस्कारित करने वाला है। हमें अपने धर्म की मर्यादा संस्कृति का ध्यान रखना चाहिए। यह सही दिशा में लिया गया कदम है। - शुभम अरोड़ा, स्थानीय निवासी
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