पलवल के अटोहां चौक पर धरना देते किसान।
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पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन पर किसान संघर्ष समिति ने आभार जताया। किसान नेताओं ने कहा कि पलवल के किसानों ने अब तक संयुक्त किसान मोर्चा के सभी आह्वानों को पूरी निष्ठा के साथ पूरा किया है। आगे भी किसान नए कृषि कानूनों की वापसी तक संघर्ष जारी रखेंगे। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज अटोहां मोड़ पर मंगलवार को भी जारी धरने की अध्यक्षता धनीराम तेवतिया ने की, जबकि संचालन लखनपाल तेवतिया ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।
किसान नेता सोहनपाल चौहान और डॉ. रघुबीर सिंह ने कहा कि किसान इन तीन कानूनों का विरोध केवल अपने लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि देश की जनता को बचाने के लिए कर रहे हैं। ऐसा ही एक विरोध शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह ने अंग्रेजों के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध 1907 में किया था, जो आंदोलन नौ महीने तक चला था। लगभग सवा सौ साल बाद हालात उसी मुकाम पर आकर खड़े हो गए हैं। देश के किसान फिर से पगड़ी संभालने मैदान में उतर चुके हैं। सरकार पिछले 10 महीने से बहाने ढूंढ रही है, जिससे किसानों को देशद्रोही साबित कर सके और किसान आंदोलन को गलत साबित कर सके। किसान नेता रमेश चंद गौड़ौता और बीधू सिंह ने कहा कि जब कोई कार्य सार्वजनिक जीवन से जुड़ा होता है तो कुछ विरोध, मखौल व तंज होना स्वाभाविक है। इसलिए कुछ लोगों द्वारा भारत बंद के विषय में टिप्पणियां करना स्वाभाविक प्रक्रिया है। जब किसान देशद्रोही ठहराए जाने पर भी विचलित नहीं हुए तो किसान अपने खिलाफ चल रही इस आभासी मुहिम से परेशान भी नहीं होगा। सवाल किसान आंदोलन के सफल या विफल ठहराने से ज्यादा सरकार की नीयत का है। नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन जैसे फैसले जब देश पर थोपे गए थे, तब भी सरकार ने बड़े बदलाव का हवाला दिया था। लेकिन, यह समझना भी बहुत जरूरी है कि बदलाव हमेशा बेहतरी के लिए नहीं होते, कई बार तबाही का सबब भी बन जाते हैं। धरने में किसान नेता उदय सिंह सरपंच, रूपराम तेवतिया, नरेंद्र सिंह सहरावत, हरी मेंबर, चंद्रमुनि आर्य, बीर सिंह, जयदेव चौहान, गोपी थानेदार, हुकम सिंह, समय सिंह, श्री चंद अलावलपुर और मुंशीराम दुधौला ने भी संबोधित किया।