पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का धरना जारी धरना जारी रहा। बृहस्पतिवार को धरने में छाता के किसानों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। छाता के किसानों ने 26 नवंबर को धरने को एक साथ पूरा होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि फसल व नस्ल बचाने के लिए चल रहे इस आंदोलन में वे तरह से साथ हैं। इस किसान संघर्ष समिति पलवल ने किसानों ने प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की। गांवों में जाकर किसानों व मजदूरों को जागरूक करने के लिए भी कहा गया।
धरने की अध्यक्षता कुलभान कुमार छाता ने की, जबकि संचालन राजेंद्र सिंह घर्रोट ने की। धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि जिला के किसानों की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। जिला में बाजरा का एक दाना भी सरकार ने नहीं खरीदा है, वहीं धान की खरीद भी मनमाने रेटों पर की जा रही है, जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। बारिश से पहले ही फसलों में भारी नुकसान हुआ है, अब खरीद न होने से किसान आगे भी फसल बोने में असमर्थ हैं। किसानों को बुआई के लिए खाद भी नहीं मिल रहा है। कई-कई दिन लाइनों में खड़ा होने के बाद भी किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हो रहा है। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री पलवल आकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। किसानों की अपील है कि मुख्यमंत्री पलवल में न आएं, वरना दुख व रोष में स्थिति बेकाबू हो सकती है। समय आने पर सरकार को जबाब दिया जाएगा।
इस अवसर पर चंद्रमुनि डागर, बीर सिंह चौहान, ग्यासी राम छाता, पोहप सिंह श्यारौली व किशन चंद बंचारी ने को किसान नेता रूपराम तेवतिया, श्रीचंद महाशय, चेतराम मैंबर, बीर सिंह दलाल, शिव सिंह थानेदार, रूपचंद दलाल, श्रीचंद नंबरदार, रणवीर सिंह छाता, कर्ण सिंह छाता, भरती बाबा, बीर सिंह छाता व राधा रमण छाता सहिच अन्य ने संबोधित किया।