फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच गांव के कब्रिस्तानों और स्कूलों में डाली गई 71 लाख की मिट्टी, एजेंसी की जांच में काम करवाने की पुष्टि नहीं

विज्ञापन
गांव रहराना में स्कूल में डाली गई मिट्टी के बारे में जानकारी देते ग्रामीण। - फोटो : Palwal
विज्ञापन
पलवल। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत गांवों में डाली गई मिट्टी के नाम पर किए गए नए घोटाले सामने आ रहे हैं। योजना के तहत पांच गांवों में 71.5 लाख रुपये की मिट्टी डलवाने का काम दिखाया गया है, जबकि मामले की जांच कर रही एजेंसी को मौके पर कोई काम होना नहीं मिला। मिट्टी गांव के स्कूलों और कब्रिस्तानों में दिखाई गई। सबसे ज्यादा गांव रहराना में 44 लाख रुपये की मिट्टी डलवाने की बात सामने आई है। मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि मनरेगा घोटाला की जांच की शुरुआत करने वाले जिला परिषद के सीईओ प्रशांत कुमार का बृहस्पतिवार रात तबादला कर दिया गया। जांच के विरोध में आठ कर्मचारी भी इस्तीफा दे चुके हैं।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, गांव रहराना के सरकारी स्कूल में 44 लाख रुपये की मिट्टी डाली गई। गांव वालों ने बताया कि मनरेगा के तहत उन्होंने मिट्टी डालने का काम नहीं किया, लेकिन बैंक खातों में रुपये जमा करवाए गए। फर्जी तरीके से जॉब कार्ड बनवाकर खातों में रुपये जमा करवाए गए। जांच के दौरान करीब 20 लोगों ने कहा कि उन्होंने काम किया। ये सभी लोग सरपंच और ठेकेदार के संबंधी बताए गए हैं। वहीं गांव लडमाकी के कब्रिस्तान में मिट्टी डालने के नाम पर 12.5 लाख रुपये निकाले गए। कब्रिस्तान में मिट्टी नहीं डाली गई और 12.5 रुपये का भुगतान किया गया। गांव हुंचपुरी के कब्रिस्तान में पांच लाख से भी अधिक धनराशि की मिट्टी डाली गई। गांव वालों के मुताबिक, मौसिम ठेकेदार ने बाहर से लोगों को लाकर कब्रिस्तान में फोटो खींचवाए थे, लेकिन मिट्टी नहीं डाली गई। इसी प्रकार गांव महलूका के कब्रिस्तान में एक से डेढ़ फीट मिट्टी डालने के नाम पर 5.5 लाख रुपये से अधिक निकाल लिए। सरपंच ने अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुछ मिट्टी डाली थी। गांव हुडीथल में मनकाकी की फिरनी वाले रास्ते में मिट्टी डालने के नाम पर करीब चार लाख रुपये निकाल लिए। मनरेगा लोकपाल पंकज शर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
जिला परिषद सीईओ का तबादला
मनरेगा घोटाल की जांच की शुरुआत करने वाले जिला परिषद सीईओ प्रशांत कुमार का तबादला कर दिया गया। जांच शुरू होने के साथ ही उसके तबादले की चर्चाएं चल रही थी। इनके स्थान पर पुन्हाना की उपमंडल अधिकारी नागरिक मनीषा शर्मा को कार्यभार सौंपा गया है। प्रशांत कुमार ने मामले जांच शुरू की थी, जिसके बाद आठ कर्मचारियों ने स्वेच्छा इस्तीफा दे दिया था। कर्मचारियों ने प्रशांत कुमार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें