फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धूमधाम से मनाया गया रूठों को मनाने का पर्व मकर संक्रांति

विज्ञापन
विज्ञापन
पलवल। रूठों का मनाने का पर्व मकर संक्रांति धूमधाम से मनाया गया। खासकर ग्रामीण परिवेश में उत्सव सा माहौल रहा। पूरा दिन रूठने-मनाने की प्रथा चलती रही। परंपरा के अनुसार बुजुर्ग और रिश्तेदार नाराज होकर चौपालों, मंदिरों में जा बैठे। महिला बैंडबाजों के साथ नाचती गातीं उन्हें मनाने के लिए पहुंची। ढेरों उपहार दिए, पैर छूकर आशीर्वाद लिया, तब बुजुर्ग माने और घर की ओर लौट पड़े। बहनें भी भाइयों के घर और मायके मिलने पहुंचीं। सबने मिलकर मंगल गीत गाए। संक्रांति पर ढेरों पकवान भी बने, लोगों ने दाल, चावल, गजक, मूंगफली आदि दान किए।
विज्ञापन

शुक्रवार को लोगों ने सुबह जल्दी उठकर स्थान किया और सूर्य को नमस्कार किया। गांवों में रास्तों में झाड़ू लगाई गई। दिन के समय महिलाएं बैंडबाजों के साथ उपहार लेकर बुजुर्गों को मनाने के लिए पहुंचीं। बुजुर्गों को मनाने के बाद पांव छूकर आशीर्वाद लिया। गांवों में चारों तरफ बैंडबाजों व ढोल की आवाजें सुनाई दीं। मकर संक्रांति पर रूठने वाले बुजुर्गों और रिश्तेदारों को घरों से दूर बैठाकर महिलाएं नाचती-गाती बैंड बाजों के साथ उन्हें मनाने पहुंची और मनाकर वापस घर लेकर आईं। महिलाओं ने कपड़े, जूते, गर्म शाल, दाल, चावल, गजक, मूंगफली व दान स्वरूप राशि भेंट कर बुजुर्गों को मनाया।
संकरात के नाम से पुकारा जाता है ब्रज क्षेत्र में
मकर संक्रांति को ब्रज क्षेत्र के गांवों में संकरात के नाम भी पुकारा जाता है। प्राचीन काल से मनाए जा रहे इस त्योहार पर एक सप्ताह पहले ही भाई अपनी बहनों के यहां संकरात देने के लिए जाते हैं। संकरात देने के दौरान बहनों के लिए गजक, दाल, चाल, मिठाई के साथ पैसे देने का रिवाज है। वहां जाकर उन्हें इस पर्व पर घर आने का निमंत्रण देकर आते हैं। संकरात दिन बहने अपने मायके जाती है और पकवान बनाए जाते हैं। पूरे दिन उत्सव सा घर में रहता है। घरों में बहनों व रिश्तेदारों के आने पर मांगलिक गीत गाए जाते हैं।
विज्ञापन

उपहार देकर बुजुर्गों को मनाने की परंपरा
मकर संक्रांति से दो दिन पहले ही घर के बुजुर्ग या कोई बड़ा रिश्तेदार घरवालों से रूठना शुरू कर देता है और नाराजगी प्रकट करने लगता है। जैसे उसे परिवार के किसी सदस्य की बात बुरी लग गई हो। संकरात वाले दिन वह बुजुर्ग घर से दूर किसी चौपाल, मंदिर या कहीं और जाकर बैठ जाते हैं। जिन्हें घर की बहु और अन्य महिलाएं लोक गीत गाते हुए बैंडबाजों के साथ मनाने जाती हैं और उपहार देकर मनाती हैं। महिलाएं इस पर्व पर तड़के ही देवरों की जेब भरने का भी रिवाज निभाती हैं। महिलाएं देवरों की जेब में मूंगफली, रेवड़ी के अलावा पैसे भरकर उन्हें मनाती हैं। यह पर्व बेहद ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
बुजुर्ग सुबह चार बजे करते हैं स्नान
ग्रामीण क्षेत्र में तड़के ही मकर संक्रांति के अवसर पर बड़े बुजुर्ग सुबह चार बजे ही स्नान कर लेते हैं। महिलाएं ने अपने घरों से लेकर श्मशान तक झाडू़ लगाती हैं। उन्होंने घर से लेकर श्मशान वाले रास्ते तक झाड़ू लगाकर परिवार के लिए सुख समृद्धि की दुआ मांगी जाती है। वहां से वे गीत गाते हुए घरों तक वापस आती है तथा स्नान करने के बाद गाय को भोजन कराया।
घरों में बनते हैं खास पकवान
मकर संक्रांति का पर्व प्राचीन काल से चला आ रहा है। यह हिंदुओं का प्रमुख पर्व माना जाता है। घरों में खास पकवान बनाए जाते हैं। चने का साग खाने का आज के दिन बेहद महत्व होता है। पहले चने के साग खेतों में खाने जाते थे, परंतु अब बाहर से खरीदकर घरों में बनाया जाता है। इसके अलावा घरों में हलवा, पूरी, कचौड़ी, चीला आदि भी बनाए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें