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Palwal News: सरसों का सरकारी समर्थन मूल्य 5450, बिक रही चार हजार रुपये में

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कैप्शन: पलवल अनाज मंडी में बिकने के लिए पड़ी सरसों
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कैप्शन: 2- किसान इब्राहिम
कैप्शन: 3- किसान भूदेव शर्मा
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मंडी में सरसों बेचने के लिए मारे-मारे फिर रहे किसान
सरकार ने खरीदी 10 दिन में मात्र 31 क्विंटल, निजी व्यापारियों ने खरीदी 4700 क्विंटल
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले के किसान अनाज मंडियों में सरसों बेचने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद उन्हें सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान किसानों के रोष को देखते हुए शुक्रवार को सरकारी खरीद कर मात्र 31 क्विंटल सरसों खरीदी गई है, जबकि निजी आढ़तियों द्वारा अब तक किसानों से समर्थन मूल्य से काफी कम दामों पर 4700 क्विंटल सरसों खरीद ली है। यह सरसों निजी व्यापारियों द्वारा किसानों से सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य से 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये कम कीमत में खरीदी जा रही है। इससे किसानों में बेहद रोष व्याप्त है।
किसानों द्वारा करीब पांच हजार हेक्टयर में सरसों की बुवाई की गई है। किसानों द्वारा इस सरसों को खेतों से काटकर मंडियों में बेचने के लिए लाना शुरू कर दिया है। पिछले करीब 10 दिनों से सरसों अनाज मंडियों में आ रही है, लेकिन सरकारी खरीद न होने के कारण किसान परेशान हैं। जिस कारण मजबूरी में किसानों को निजी व्यापारियों के यहां कम कीमत में सरसों बेचनी पड़ रही है। किसान इस समस्या को लेकर कई बार मार्केटिंंग बोर्ड के अधिकारियों से भी मिल चुके हैं, फिर भी सरसों की सरकारी खरीद नहीं की गई। शुक्रवार को सुबह किसानों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए खानापूर्ति के लिए सरकारी खरीद शुरू की गई और मात्र 31 क्विंटल खरीद कर बंद कर दी गई।
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सरकार द्वारा इस बार सरसों का समर्थन मूल्य 5450 रुपये तय किया है। किसानों को भी सरसों के तय रेट से थोड़ी खुशी थी, लेकिन मंडी में लाने के बाद किसानों को सरसों का समर्थन मूल्य नहीं मिलने पर खुशी खत्म हो गई। किसान मंडी में पहुंचे तो सरकार द्वारा खरीद नहीं की गई। जिसके बाद निजी एजेंसियों द्वारा किसानों से उनकी सरसों की फसल चार हजार रुपये से लेकर 5100 रुपये में खरीदनी शुरू कर दी। एक हजार रुपये तक कम कीमत में सरसों की खरीद होने के कारण किसानों में रोष बना हुआ है। किसानों की माने तो डीजल व खाद के दाम बढ़ने के बाद सरसों की लागत काफी बढ़ गई है, जबकि सरसों काफी कम दामों में बिक रही है। पिछले साल डीएपी खाद, डीजल, बीज, खेत की जुताई आदि का खर्चा इस साल की अपेक्षा कम था, लेकिन सरसों के भाव पिछले वर्ष के समान ही हैं।

इस बार पहले ही खेतों में सरसों कम बैठी है। लागत काफी ज्यादा आ चुकी है, लेकिन सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य पर खरीद की ही नहीं जा रही है। निजी व्यापारी 4 हजार रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक में ही बिक रही है। इससे काफी नुकसान हो रहा है। सरकार का ध्यान बिल्कुल भी किसानों की तरफ नहीं है। -इब्राहिम किसान, रजपुरा

सरकार ने सरसों की फसल के लिए जो समर्थन मूल्य तय किया हैै, वह नहीं मिल रहा है। किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसानों की सरसों की बुवाई करने में जो लागत आई है, वह भी नहीं निकल पा रही है। सरकार के अधिकारी निजी व्यापारियों से मिलकर चूना लगा रहे हैं। किसानों को लूटने का काम किया जा रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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-भूदेव शर्मा, किसान नंगला भीकू
अनाज मंडी में शुक्रवार को ही 31 क्विंटल सरसों खरीदी है। सरसों की जांच करने के बाद नमी को देखकर ही खरीदा जा रहा है। किसानों की सरसों समर्थन मूल्य पर ही खरीदी जाएगी। किसानों को नमी दूर कर सुखाकर सरसों लानी चाहिए। सरकार के आदेशों के अनुुसार ही मंडी में सरसों व गेहूं की खरीद की जाएगी। -नरवीर गहलौत, सचिव मार्केट कमेटी पलवल
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