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जिले में जगह-जगह जलाया जा रहा कूड़ा, पर प्रशासन का ध्यान नहीं

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पलवल। जिले में एक तरफ किसानों द्वारा पराली जलाई जा रही है तो दूसरी तरफ कूड़ा जलाया जा रहा है लेकिन प्रशासन का ध्यान केवल पराली जलाने पर है। न तो प्रशासन को कूड़ा जलता दिखाई दे रहा है और न ही कूड़ा जलाने वाले जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आग लगाने से उठने वाले धुएं ने सांस व अस्थमा के मरीजों का ही नहीं, सामान्य लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। बाहर निकलने पर लोगों को सांस की परेशानी होने लगी है। साथ ही आंखों में भी एलर्जी की समस्या लोगों में हो रही है। ऐसा कूड़ा व पराली जलाने से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण हो रहा है।
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जिले में शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि गांवों में भी कूड़ा जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गांवों में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद से गलियों में कूड़े के ढेर में आग लगाने की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं, क्योंकि अब कूड़ा जलाने वालों को रोकने वाला कोई नहीं है। सफाई कर्मी भी खुद कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं। इसी तरह से शहरी क्षेेत्रों में हो रहा है। शहर में भी जगह-जगह कूड़ा जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
प्रदूषण का स्तर रहा 201
लगातार कूड़ा जलाने के कारण जिले में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। बुधवार को भी प्रदूषण का स्तर 201 दर्ज किया गया। पीएम-10 का स्तर अधिकतम 416 रहा, जबकि औसतन 201 रहा। उसी तरह से पीएम-25 का स्तर अधिकतम 301 तथा औसतन 119 रहा। हालांकि अन्य दिनों के मुकाबले प्रदूषण का यह स्तर कम है, फिर भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग इसे खतरे के निशान पर मानता है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग का मानना है कि 200 से ऊपर स्तर जाते ही सांस व अस्थमा के मरीजों के लिए खतरनाक हो जाता है।
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शहरी क्षेत्रों में इन स्थानों पर जलाया जा रहा है कूड़ा
पलवल शहरी क्षेत्रों में सब्जी मंडी, अनाज मंडी, मीनार गेट, बाजार, पुराने जीटी रोड, पुरानी सब्जी मंडी, कैंप मार्केट, हूडा सेक्टर दो, ओमेक्स सिटी के पास कूड़ा जलाया जा रहा है। इनके अलावा राजमार्ग पर भी कई जगह कूड़ा जलता देखा जा सकता है। इसी तरह से गांव बामनीखेड़ा, लाडियाका, बाता, लुलवाडी सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां गांव की गलियों में पड़े कूडे़ के ढेर जलते देखे जा सकते हैं।
धुएं से बचकर रहने की सलाह
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. लोकवीर का कहना है कि जहां कूड़ा जलाया जा रहा है, वहां लोगों को जाने से बचना चाहिए, खासकर सांस व अस्थमा के मरीजों को धुएं से बचाव करना चाहिए। कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि कूड़े में कई बार पॉलीथिन व अन्य ऐसे पदार्थ जला दिए जाते हैं, जिससे शरीर को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे में समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से मिले।
कूड़ा जलाने वालों पर प्रशासन को सख्ती बरतनी चाहिए। उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा कूड़ा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को जगह-जगह पड़े कूड़े के ढेर को उठवाना चाहिए, ताकि लोग कूड़े में आग न लगाएं।
-अनुभव मंगला, पलवल
कूड़ा जलाने की घटनाएं आम हो गई हैं, इसका कारण जगह-जगह पड़े कूड़े के ढेर हैं। प्रशासन, विकास एवं पंचायत विभाग तथा नगर परिषद कूड़े व गंदगी को उठाते नहीं हैं, जिससे लोग उनमें आग लगा देते हैं। ऐसे में प्रदूषण फैलेगा ही। प्रशासन को चाहिए कि गंदगी व कूड़े के ढेर नियमित उठवाएं।
-बिजेंद्र पाठक, अध्यक्ष पर्यावरण सुरक्षा समिति
जिले में कूड़ा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। जहां भी कूड़ा जलता मिलेगा या कोई जलाता मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कूड़े के ढेरों को उठवाने के लिए आदेश दे दिए गए हैं। सभी ग्राम सचिवों को आदेश दे दिए हैं कि कूड़े के ढेरों को उठवाया जाए। शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को भी इस बारे में निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
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-कृष्ण कुमार, उपायुक्त पलवल
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