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सेम की समस्या से किसान परेशान, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

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सेम की समस्या से परेशान पलवल के किसान उपायुक्त को ज्ञापन देने जाते - फोटो : Palwal
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पलवल। जिले के गांवों में सेम की समस्या से परेशान अल्लीका-बामनीका गांव के किसानों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन ‘पलवल बचाओ एकता मंच’ के बैनर तले दिया गया। उपायुक्त के प्रतिनिधि के रूप में ज्ञापन लेने आए तहसीलदार रोहताश से किसानों ने कहा कि पिछले काफी समय से उनके खेतों में पानी भरा है। हालात ये है कि सैकड़ों एकड़ भूमि में खड़ी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। इस सेम की समस्या के कारण किसानों की पूरी फसल नष्ट हो गई है।
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तहसीलदार को बताया कि उनके गांवों में सेम की समस्या का मुख्य कारण गोछी ड्रेन में सिंचाई विभाग द्वारा बनवाई गईं ठोकर तथा ड्रेन की ठीक से सफाई नहीं कराना है। इसके कारण खेत पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं। अब तक गोछी और जनौली ड्रेन की सफाई नहीं हुई है। आज भी खेतों में चार-चार फिट पानी भरा है। किसानों ने बताया कि यदि समस्या को दूर नहीं किया गया तो आने वाले समय में भी आगे फसल नहीं बोई जा सकेगी। किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। किसानों की मांग थी किसेम की समस्या के कारण जो फसल बर्बाद हुई है, उसका सरकार मुआवजा दे तथा ऋण पर ब्याज की माफी कराई जाए। किसानों ने मांग की है कि खेतों में भरे पानी को निकलवाने के लिए तुरंत बोर करवाकर तथा पंप सेट लगवाकर पानी को निकलवाया जाए। गोछी ड्रेन में बनाई गई ठोकर को हटवाया जाए। इस अवसर पर देवी सिंह, रोहताश मलिक एडवोकेट, गंगाराम, किशन सिंह, धन सिंह, निरंजन, बिर्जेश, अर्जुन सिंह, महेंद्र, गंगाराम प्रमुख रूप से मौजूद थे।
तहसीलदार रोहताश ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी इस समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार से भी गिरदावरी कराने के आदेश हैं। जल्द ही पटवारी की ड्यूटी लगाई जाएगी तथा वहां की सारी रिपोर्ट लेकर पानी निकासी का इंतजाम कराया जाएगा। किसानों की इस समस्या का जल्द समाधान कराने के लिए उनके द्वारा दिए गए ज्ञापन को वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।
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गोंछी ड्रेन में ठोकर बनाने से हुई समस्या
सिंचाई विभाग द्वारा गोछी ड्रेन की सफाई के लिए छह करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया था, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण ड्रेन में नीचे तक खुदाई करने के बजाय उसे समतल कर ड्रेन में ठोकर बना दी गई। ऐसा कारना गांव तक खेतों में नहरी पानी पहुंचाने के लिए किया गया। इसके चलते पानी नहर में चलने के बजाय आसपास के खेतों में घुस गया। इससे सेम की समस्या उत्पन्न हो गई। इसके कारण करीब एक हजार एकड़ में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है।
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