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आलोचना करने वाले थके, परंतु किसान नहीं

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पलवल। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त कराने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। कार्यक्रम की शुरुआत में औरंगाबाद में एक ही परिवार के पांच सदस्यों, मीतरोल गांव के अध्यापक गजेंद्र चौहान, रुंधी के किसान गिर्राज जेलदार के छोटे भाई की पत्नी तथा टीकरी बॉर्डर पर किसान की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। इस दौरान दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की गई। धरने की अध्यक्षता ग्यासीराम छाता ने की।
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किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद ने बताया कि कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के शुरुआत में जल्द समाप्त होने के बड़े कयास लगाए जा रहे थे। कोई किसानों को नकली तो कोई आतंकवादी व देशद्रोही बोल रहा था, लेकिन आंदोलन को 10 महीने बीत गए तथा आंदोलन की ताकत कई गुना बढ़ गई। आंदोलन की आलोचना करने वाले थक गए, लेकिन किसान नहीं थके। किसान और खेती के प्रति सरकार की नीयत जस की तस बनी हुई है। लोक कल्याणकारी और किसान हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार देख रही है कि किसान तमाम मुश्किलों और संघर्षों के बावजूद टिके हुए हैं कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून बनाए, लेकिन सरकार बहुमत के अहंकार में किसानों की बात को सुनना नहीं चाहती।
धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, रघुबीर सिंह, डिगंबर सिंह मथुरा, रमेश सौरोत, उदय सिंह सरपंच, ताराचंद, रुपराम तेवतिया, बीधू सिंह, कुलभानु कुमार, शिव सिंह छाता, श्रीचंद महाशय, शिव सिंह छाता, रोशन लाल अल्लीका व ठाकुरलाल ने भी संबोधित किया।
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