संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। आशा वर्कर्स यूनियन का जिला कार्यकर्ता सम्मेलन बुधवार को नागरिक अस्पताल पलवल में संपन्न हुआ। सम्मेलन में 73 दिन तक चली यूनियन की राज्यव्यापी हड़ताल के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुए समझौते को लागू न करने पर विरोध जताया गया। कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन में सरकार से समझौते को जल्द लागू करने की मांग की। जिला प्रधान रामरति चौहान की अध्यक्षता में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन का संचालन जिला सचिव बबली सैनी ने किया। सम्मेलन में सभी प्राथमिक व सामुदायिक के चुने हुए पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहीं।
सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 26 से 28 नवंबर तक पलवल अटोंहा मोड़ पर आयोजित होने वाले किसान-मजदूर महापड़ाव में बढ़-चढ़ कर भाग लिया जाएगा। आगामी 12 दिसंबर को यूनियन के जिला कमेटी के सांगठनिक चुनाव कराने का भी निर्णय किया गया। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा ने कहा कि 73 दिनों तक चली हड़ताल के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ संपन्न बैठक में मानी गई मांगों का नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। आशा पे एप बंद होने से पिछले चार महीने से बकाया मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन 26 हजार, आशा कार्यकर्ता को पक्का करने व स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा देने, पेंशन व ग्रेच्युटी मांग को लेकर सैकड़ों आशा मजदूर महापड़ाव में भाग हिस्सा लेकर अपनी आवाज उठाएंगी। सम्मेलन में सीआईटीयू के नेता रमेश चंद, यूनियन की नेता जगबती डागर, सरोज, पूर्व प्रधान गीता, राजन, सुदेश, ममता, कुसुम, अनीता, बाला, रजनी, राजरानी, पपीता, मुनेश, पूजा, बिमला, रोशनी व हेमलता ने भी विचार रखे।