भगवान को नमन करते जैन समाज के लोग।
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नारनौल। पर्यूषण महापर्व के पांचवें दिन मंगलवार को शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर व पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। दीपांश ने उत्तम सत्य धर्म के बारे में बताया कि जो सत्य तक पहुंचा दे वहीं उत्तम सत्य धर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सप्त तत्वों का ज्ञान कराते हुए मोक्ष प्राप्ति का सरल मार्ग बताया। सत्य का संबंध ज्ञान और विवेक से है।
सत्य को बोलने से ज्यादा जानना जरूरी है। इतिहास बताता है कि सत्य को सदैव अपमानित किया गया है। यह दुनिया सत्य की पक्षधर नहीं रही है। सत्य अकेला खड़ा होता है और झूठ के साथ पूरा गिरोह होता है। सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। अंतिम विजय सत्य की ही होती है। सच कड़वा होने की धारणा अनुचित है। यह एक प्रकार से सत्य पर मिथ्या लांछन भी है। सच तो स्वाभाविक रूप से मधुर होता है। कड़वाहट सच में नहीं अपितु सत्य बोलने के दंभ के कारण बोलने वाले के मुंह में होती है। मन और सोच कड़वे होंगे तो सच कड़वा ही लगेगा। इस मौके पर अरुण जैन, प्रमोद जैन, संदीप जैन, पंकज जैन गोपाल, गौतम व नितिन मौजूद रहे।