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जिला अस्पताल में नहीं है बुखार, दर्दनाशक तथा एंटीबायोटिक दवाइयां

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नारनौल। भले प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि जिले के नागरिक अस्पताल में दर्दनाशक तथा एंटिबॉयोटिक आदि दवाइयां नहीं है। सरकार की ओर से अस्पतालों में अलग-अलग रोगों की लगभग 320 दवाइयां निर्धारित की हुई हैं। इनमें लगभग 120 दवाइयां उपलब्ध हो पाती हैं। शेष दवाइयां अस्पताल में होती ही नहीं। 120 मुख्य दवाइयां में भी कई दवाइयां नहीं आ रहीं। तीन साल से बच्चों की पैरासिप दवा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा जोड़ दर्द या गुम चोट पर लगाने वाला जैल भी नहीं है। तीन दिनों से आयरन की गोलियां भी खत्म हो गई हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 1500 ओपीडी होती है। जिनमें चिकित्सकों द्वारा लिखी गई 50 प्रतिशत दवाइयां अस्पताल में मिल रही हैं। शेष दवा मरीजों को बाजार से खरीदना पड़ता है।
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सरकार नागरिक अस्पताल को दवाइयां खरीदने का बजट जारी करती है। छह-छह महीने में दो बार बजट जारी होता है ताकि दवाइयां खत्म होने पर खरीदी जा सकें और मरीजों को परेशानी न हो। नागरिक अस्पताल नारनौल का बजट छह महीने का 50 लाख रुपये का होता है, लेकिन उन्हें 25 लाख रुपये ही मिलते हैं। 25 लाख रुपये से जच्चा बच्चा वार्ड, आपातकालीन वार्ड, बच्चों का वार्ड आदि वार्डों की दवाइयां आती हैं। ओपीडी के दौरान मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां का बजट कम ही रहता है। राज्य सरकार ने प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर दवाइयों के स्टॉक के लिए वेयर हाउस बनाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय चंडीगढ़ से दवाइयां खरीदकर वेयरहाउस में भेज देते हैं। वेयरहाउस के अंदर दवाइयों की उपलब्धता ऑनलाइन चढ़ा दी जाती है। जिन पीएचसी, सीएचसी, उप नागरिक अस्पताल तथा नागरिक अस्पताल सहित अन्य अस्पताल के इंचार्ज वेयरहाउस भिवानी से मंगवा सकते हैं। अगर वेयर हाउस में दवाइयां नहीं होती तो सरकार अस्पताल को दवाइयां खरीदने का बजट देती है। उस बजट से जो दवाइयां कम होती हैं वह खरीदनी होती है।
इंसेट
अस्पताल में ये दवाइयां उपलबध नहीं
पिछले तीन वर्षों से अस्पताल के अंदर बच्चों को बुखार होने पर दी जाने वाली पैरासिप नहीं है। इसके अलावा दर्द की आईब्रूप्रोफेन, एंटी बायोटिक डिक्लो, डिक्लोपैरा भी नहीं है। बड़ों के लिए एंटी बॉयोटिक अमोक्सी, अमोक्सीनसिलिव, डोक्सीसाइक्लीन आदि दवाइयां भी खत्म हैं। दर्द होने पर लगाने वाली डिक्लो जैल तथा गर्म पट्टी भी नहीं है।
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इंसेट
चिकित्सक ने पांच दवाइयां लिखी थीं। जिनमें एक दवा ही अस्पताल के अंदर मिली है। चार दवाएं बाजार से लेनी पड़ेंगी। नागरिक अस्पताल में केवल खानापूर्ति की जा रही है। -मिंटू शिमला
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नागरिक अस्पताल में जरूरी दवाइंया भी नहीं हैं। मरीजों को बाजार से दवाइयां लेनी पड़ रही हैं, लेकिन कोई सुनवाई करने वाला नहीं। मरीजों को नागरिक अस्पताल का कोई फायदा नहीं मिल रहा है।-नेहा दनचोली
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अस्पताल में दवाइयां पूरी नहीं मिल रहीं है। अगर चिकित्सक ने चार दवाइयां लिखी हैं तो अंदर दो ही मिलती हैं। दो तो बाजार से लेनी पड़ती है। सरकार को दवाईयों की कमी जल्द पूरी करनी चाहिए। - पिंकी कमानियां।
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नागरिक अस्पताल में मरीजों को दवाइयां बाजार से लेनी पड़ रही है। जिससे परेशानी होती है है साथ ही आर्थिक भार भी पड़ता है। सरकार दवाइयों की कमी को तत्काल पूरी करे। ताकि मरीजों को बाहर से दवा लेनी पड़े। -माधुरी नारनौल।
वर्जन
इस समय सभी प्रकार ओपीडी बढ़ रही है। जिससे दवाइयों की कमी हो जाती है। अस्पताल के अंदर वेयर हाउस भिवानी से दवाइयां आती हैं। इसके लिए हमने आज गाड़ी भेज दी है। कल तक दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध हो जाएंगी। -डॉ. आशा शर्मा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, नारनौल।
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