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नहीं थम रहा डीएपी का संकट

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पिछले दस दिनों से क्षेत्र में डीएपी खाद की कमी के चलते किसान दरदर भटकने को मजबूर है। शुक्रवार को भी अधिकांश बिक्री केंद्रों पर खाद नहीं आने से किसानों को राहत नहीं मिल पाई। कनीना में वीरवार को लगाए जाम के बाद शुक्रवार को केंद्र पर 600 बैग पहुंचे। खाद आने की सूचना के बाद करीब एक हजार किसान खाद लेने पहुंच गए। भारी संख्या में उमड़ी किसानों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने खरीद केंद्र पर टोकन बांटे तथा खाद के ट्रक को लेकर थाने पहुंच गए। इसके बाद पुलिस द्वारा थाने खाद का वितरण कराया गया। इसके बाद किसानों को टोकन देकर वितरण शुरू किया गया।
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महेंद्रगढ़ में पांचवें दिन भी खाद नहीं आने से किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ा। किसान दिनभर केंद्र पर पहुंचकर पूछताछ करते रहे। क्षेत्र में सोसायटी के करीब 12 बिक्री केंद्र हैं। आकोदा केंद्र पर शाम के समय करीब 150 बैग खाद के बैग आए। खाद आने की सूचना के बाद किसानों की भीड़ जमा हो गई। एक किसान को केवल एक ही खाद का बैग दिया गया।
शहर के अधिकांश निजी दुकानों पर एसएसपी का स्टॉक भी खत्म हो चुका है। ऐसे में किसानों के सामने अब डीएपी के विकल्प के रूप में एसएसपी भी नहीं मिल रहा है। विशेषज्ञों द्वारा डीएपी की कमी के चलते एसएसपी खाद का प्रयोग करने की सलाह किसानों को दी जा रही थी। लेकिन अब दुकानों पर एसएसपी का भी स्टॉक खत्म हो चुका है। ऐसे में किसान दिनभर भागदौड़ कर शाम को खाली हाथ लौट रहा है।
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क्षेत्र में हर वर्ष 15 से 25 अक्तूबर तक सरसों की बिजाई के लिए मौसम अनुकूल रहता है लेकिन इसके बाद पछेती बिजाई से उत्पादन प्रभावित होने की संभावना अधिक रहती है। इस बार अच्छी बारिश होने से खेतों में भी पर्याप्त मात्रा में नमी थी। किसानों को सिंचाई भी नहीं करनी पड़ी। अब खाद संकट के बीच तय समय पर बिजाई करना किसानों के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
खाद के लिए चल रही मारामारी के बीच अब लगातार महिला किसानों की संख्या बढ़ रही है। महिलाएं सुबह चार बजे से ही पहुंचकर जहां उम्मीद होती है वहीं खाद के लिए लाइनों में लग रही हैं। शहर में निजी दुकानों के बाहर भी महिलाओं की भीड़ दिनभर लगी रहती है।
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