पूजन में उपस्थित जैन समाज की महिलाएं। संवाद
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नारनौल। पर्यूषण महापर्व के सातवें दिन वीरवार को महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विधि-विधान के साथ उत्तम तप धर्म की पूजा की गई। पूजा के बाद सभी ने उत्तम तप धर्म को अंगीकार कर धर्म का पालन करने का संकल्प लिया।
इस मौके पर दीपांश ने कहा कि तप शब्द सुनने से लगता है कि बहुत कठिनाई का जीवन जीना। परंतु तप या तपस्या के असली मायने हैं जिंदगी को बहुत आसानी से जीना। हमारा जीवन इच्छाओं का अक्षय पात्र है और उनको पूरा करने के लिए हम अपने जीवन में कितनी मुश्किलें खड़ी कर लेते हैं। इच्छाओं का निरोध करना तप है। भोगों को रोकना ही तप है। पांचों इंद्रिय विषयों को तथा चारों कषायों को रोक कर शुभ ध्यान की प्राप्ति के लिए आत्म-चिंतन करना और एकाकी ध्यान में लीन होना तप है। इस मौके पर अमित जैन, अरुण जैन, कपिल जैन, मनीष जैन, सुरेंद्र जैन, गौतम, अजीत प्रकाश जैन व राजेंद्र प्रसाद जैन मौजूद रहे।