महंगाई की मार चाय की चुस्की पर भी दिखाई देने लगी है। चायपत्ती, चीनी के बाद अब मिट्टी के कुल्हड़ भी महंगे हो गए हैं, इसलिए कुल्हड़ की चाय भी मंहगी हो गई है। क्योंकि शादी-विवाह के चलते कुल्हड़ की मांग अधिक हो गई है, जिसकी वजह से बाजार में मांग के अनुसार कुल्हड़ उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मांग अधिक और उपलब्धता कम होने से दाम बढ़ गए हैं। अगर कोई कुल्हड़ में चाय पीना चाह रहा है तो उसे अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
चाय विक्रेता रामौतार, रोहताश, प्रदीप व जगदीश ने बताया कि पहले 100 रुपये में 100 कुल्हड़ मिलते थे, लेकिन विवाह-शादी का सीजन होने की वजह से अब 150 रुपये में मिल रहे हैं। वहीं कुल्हड़ बनाने वाले कारीगर सावंत, गुरदयाल व निरजंनलाल ने बताया कि महंगाई के दौर में मिट्टी का कार्य करने वाले को अगर बचत नहीं होगी तो कौन काम करेगा। वैसे भी कोरोना महामारी ने सबकुछ हिला कररख दिया है। कोरोना महामारी के बाद कुल्हड़ में चाय पीने की आदत लोगों ने अपना ली है। जिससे चाय की दुकानों पर कुल्हड़ की मांग अधिक बढ़ गई है।
नारनौल में करीब सौ चाय की दुकानें हैं। जिस पर रोजाना हजारों की संख्या में लोग कुल्हड़ में चाय पीते हैं। जिससे कुल्हड़ बनाने वाले कारीगर की मजदूरी भी बन जाती है। चाय विक्रेताओं ने बताया कि कोरोना के बाद कुल्हड़ में चाय पीने की लोगों की धारणा बन गई है कि प्लास्टिक के गिलास में चाय नहीं पीनी चाहिए। वहीं डॉक्टरों ने भी माना है कि मिट्टी के बर्तन में चाय पीना सेहत के लिए अच्छा होता है। चाय विक्रेता रोहताश ने बताया कि कई बार दुकान पर मिट्टी के कुल्हड़ नहीं होने के कारण ग्राहक चाय ही नहीं पीता। इससे दुकानदारी पर असर पड़ता है।
चिकित्सकों की मानें तो प्लास्टिक में गर्म चाय डालने से प्लास्टिक के खतरनाक केमिकल निकलते है। जिससे चाय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाती है। मिट्टी के बने कुल्हड़ नेचुरल है। वहीं इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। इसलिए हमेशा चाय कुल्हड़ में पीनी चाहिए। -डॉ. पवन कुमार।