नारनौल। कोर्ट की ओर से सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को 20-20 साल की सजा दिए जाने के बाद पीड़िता का परिवार खुश है। आज उन्हें तीन वर्षों बाद इंसाफ मिला है। पीड़िता की मां ने कहा कि आज उसके कलेेजे का ठंडक मिली है। तीन वर्षों से उनके घर में होली- दिवाली तो क्या ज्योत बत्ती तक नहीं होती थी। अब हर रोज उनके घर दिवाली रहेगी।
उन्होंने कहा कि उसे अपनी बेटी पर नाज है। वह बेटी को काबिल अफसर बनाएगी। पीड़िता की मां ने कहा कि किसी की बहन बेटी के साथ इस प्रकार की गंदी वारदात न हो। अगर किसी के साथ ऐसा हुआ तो वह हर बेटी और बहन के साथ खड़ी होकर लड़ाई लडे़गी। वह अनपढ़ जरूर है, लेकिन इस वारदात ने उनको बहुत कुछ सिखा दिया है।
पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी इस लड़ाई में अधिकारियों ने बहुत साथ दिया है। पुलिस अधीक्षक एवं उपायुक्त फोन करके उनसे पूछते रहते थे। इसके अलावा उन्हें काफी प्रोत्साहित भी करते थे। उन्होंने बताया कि कई बार तो पुलिस अधीक्षक उनके घर पर भी आकर गए हैं। आज उनके सहयोग से ही उन्हें यह लड़ाई जीती है। अन्यथा वो अकेली पड़ जाती।
-------------------------
तीन वर्षों से घर की चल रही है सुरक्षा
वारदात के बाद रेवाड़ी पुलिस अधीक्षक ने पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ा दी थी। उस समय ही घर पर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए थे। तीन वर्षों से चार पुलिस कर्मचारी 24 घंटे उनके घर पर तैनात रहे हैं। फैसले की तारीख निर्धारित हो जाने के बाद घर की सुरक्षा और अधिक बढ़ा दी गई। घर पर 11 पुलिसकर्मी तैनात हैं।
----------------------
रिश्तेदारों ने किया प्रोत्साहित, दोबारा शुरू की पढ़ाई
पीड़िता की मां ने बताया कि वारदात के बाद बेटी का पढ़ाई से मन टूट गया था। उसको कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। उसको रिश्तेदारों एवं अधिकारियों ने काफी प्रोत्साहित किया। उसके बाद उसने घर पर रहकर ही पढ़ाई की। मां ने बताया कि वह आगे भी बेटी को पढ़ाएंगी। वारदात के बाद तो घर में कैद होकर रह गए थे। हमेशा बाहर जाने से डर लगता था।
-----------------------
थाना प्रभारी सस्पेंड तथा रेवाड़ी एसपी का हुआ था तबादला
उक्त मामला नेशनल मीडिया में भी काफी चर्चा में रहा था। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। इस वजह से रेवाड़ी और कनीना पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। इस मामले रेवाड़ी में जीरो एफआईआर दर्ज करके कनीना थाने भेजी गई। इस मामले में सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार और महिला थाने की सब इंस्पेक्टर हीरामणि एवं कनीना थाना प्रभारी को भी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया था। तत्कालीन एसपी राजेश दुग्गल का भी तबादला कर राहुल शर्मा को रेवाड़ी का पुलिस अधीक्षक बनाया गया था।
-----------------------------
एक महीने अस्पताल में भर्ती रही थी पीड़िता
गैंगरेप की जघन्य वारदात को इसी से समझा जा सकता है कि लड़की की हालत बहुत खराब हो गई थी। एक महीने तक वह रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में भर्ती रही थी। चार दिन तक उसकी हालत गंभीर रही तथा कुछ खाया पिया नहीं था।
----------------------
एक लाख रुपये का रखा था इनाम
उक्त मामले में पुलिस ने गैंगरेप के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। 11 दिन तक मुख्य आरोपी पंकज फौजी एवं मनीष पुलिस गिरफ्त से बाहर रहे। बाद में एसआईटी इंचार्ज नाजनीन भसीन रेवाड़ी ने आरोपियों को सुराग देने वाले को एक लाख रुपये दिए जाने का इनाम रखा था। वारदात के 11 दिन बाद मुख्य आरोपी सतनाली के पास से गिरफ्तार किए गए थे। संवाद