यूक्रेन में हालात बहुत खराब है। वहां के राज्यों में रेड जोन घोषित किया हुआ है। सभी छात्र-छात्राएं एवं यहां के निवासी छोड़-छोड़कर जा रहे हैं। उसके परिजन भी काफी चिंतित हैं। हर घंटे माता-पिता तथा रिश्तेदार फोन कर हालचाल पूछ रहे हैं। यह कहना है यूक्रेन में रह कर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे आदित्य वर्मा का।
छात्र का कहना है कि वह वह चेर्निवत्सि में तृतीय सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है। यह एरिया रोमानिया बॉर्डर के पास है। वहीं छात्र ने बताया कि केंद्र सरकार बहुत अच्छा कार्य कर रही है व एंबेसी बहुत सहयोग कर रही है। खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं है। रोमानिया से प्रतिदिन फ्लाइट विद्यार्थियों को लेकर जा रही है।
रात कहा बीतेगी कोई जानकारी नहीं
छात्र आदित्य वर्मा ने बताया कि आज शाम को वो बस से रोमानिया के लिए निकल जाएंगे। बॉर्डर पर चेकिंग चल रही है इस वजह से रोमानिया बॉर्डर पर काफी भीड़ होने की वजह से जाम लगा होने की सूचना मिल रही है। इस वजह से बस दस किलोमीटर पहले ही उतार सकती है। इतनी दूर सामान लेकर पैदल ही निकलना पड़ेगा। इसके बाद रोमानिया बॉर्डर से एयरपोर्ट जाएंगे। एयर पोर्ट से दिल्ली या मुंबई की फ्लाइट मिलेगी। उन्होंने बताया कि रात कहा बीतेगी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन केंद्र सरकार अच्छा कार्य कर रही है।
युद्ध का लग रहा था डर
एमबीबीएस की छात्रा शिवानी ने बताया कि वह चेर्निवत्सि में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं। अभी वह चौथे सेमेस्टर में है। उसने बताया कि युद्ध के नाम से उन्हें बहुत डर लग रहा था। बाद में एंबेसी ने एडवाइजरी जारी कर दी थी कि जो विद्यार्थी जाना चाहे तो वह जा सकता है। उस समय हालात ठीक थे लेकिन कोई भी आदमी अपना देश नहीं छोड़ना चाहता था।
ऐसी परिस्थितियों में भी वहां के शिक्षक विद्यार्थियों की देखरेख में लगे
कनीना निवासी कविता ने बताया कि वह भी चेर्निवत्सि में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है और उसका प्रथम सेमेस्टर पूरा हुुआ है। यह क्षेत्र पश्चिम की ओर पड़ता है जो कि युद्ध वाले क्षेत्र के एकदम विपरीत है। उनका इलाका सुरक्षित था। परिजन काफी चिंतित थे। एडवाइजरी जारी हो गई थी। रात को निकलने नहीं दे रहे थे।
कॉलेज बंद हो गए थे। इसके बाद एंबेसी ने विद्यार्थियों को देश छोड़ने के लिए कहा तो वो 23 फरवरी को देश लौट आई। उनकी परीक्षा चल रही थी। एक पेपर हो भी चुका था। उसके बाद परीक्षा स्थगित कर दी है वहां के लोग बहुत अच्छे हैं। ऐसी परिस्थितियों में भी वहां के शिक्षक अपने बच्चों को छोड़कर विद्यार्थियों की देख रेख में लगी हुई हैं।