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2.6 डिग्री तापमान के साथ महेंद्रगढ़ रहा प्रदेश में सबसे ठंडा

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नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते कर्मचारी। - फोटो : Narnol
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2.6 डिग्री न्यूनतम तापमान के साथ महेंद्रगढ़ प्रदेशभर में सबसे ठंडा रहा। वहीं मौसम विभाग द्वारा अगले 48 घंटों में क्षेत्र में कोल्ड डे रहने की संभावना जताई जा रही है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण 21 जनवरी को क्षेत्र में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी की संभावना भी जताई जा रही है। वहीं 20 जनवरी तक मौसम शुष्क तथा आंशिक बादलवाई रहेगी जिसके कारण ठंड सताएगी। पिछले एक सप्ताह से पड़ ही कड़ाके की ठंड के चलते लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। सोमवार को भी आसमान में छाए हल्के बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन भी महज कुछ ही समय के लिए हो पाए। सुबह के समय कोहरा छाया लेकिन कम कोहरा होने के कारण यातायात प्रभावित नहीं हुआ। वहीं ठंड के चलते क्षेत्र की सरसों व गेहूं दोनों ही प्रमुख फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।
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अधिक ठंड से फसलों की रुकी बढ़वार
लगातार पड़ रही अधिक ठंड के कारण फसलों की बढ़वार भी प्रभावित हो रही है। इस समय सरसों में फूल में फलियां बननी आरंभ हो चुकी हैं। अधिक ठंड के चलते इसकी अपेक्षा से कम बढ़वार हो रही है। वहीं गेहूं की बढ़वार भी धीमी गति से हो रही है। अधिक ठंड के चलते भूमि से पोषक तत्व लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस समय जिला में 365200 एकड़ में विभिन्न फसलें खड़ी हैं। इसमें सबसे अधिक रकबा क्षेत्र की प्रमुुख फसल सरसों का है जो 2 लाख 70 हजार एकड़ है। वहीं दूसरी प्रमुख फसल के रूप में जिले के किसानों ने 75 हजार एकड़ में गेहूं की फसल बिजाई की है। 12 हजार एकड़ में चने की फसल खड़ी है। फल व सब्जियों का रकबा भी जिले में 1500 एकड़ में फैला हुआ है। वहीं जौ का रकबा 700 एकड़, पशु चारा 4300 एकड़ व किसानों ने इस बार 700 एकड़ में मटर की खेती की है।
अगले 48 घंटों के दौरान क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर कोहरा तथा कोल्ड डे की स्थिति संभावित है। न्यूनतम तापमान भी गिरकर 2.6 तक पहुंच चुका है। वहीं अधिकतम तापमान 14.7 डिग्री सेल्सियस रहा। हवाओं की गति भी पांच-छह किलोमीटर प्रति घंटे रही।
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-डॉ. दिवेश चौधरी, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।
अधिक ठंड के चलते पौधों में भूमि से पोषक तत्व लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है जिसके कारण बढ़वार में हल्की रुकावट आती है लेकिन जिलेभर में फसलें निरोग हैं जिसके कारण उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। इस समय सरसों की फलियां बननी शुरू हो चुकी हैं। अधिक ठंड के कारण पौधों की बढ़वार अपेक्षाकृत कम हो रही है।
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-डॉ. रमेश कुमार, संयोजक, कृषि विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़।
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