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खेल की मूलभूत सुविधाओं की कमी

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महेंद्रगढ़ खेल स्टेडियम में उगी झाड़ियां। - फोटो : Narnol
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जिले में खेलों के लिए बुनियादी ढांचा एवं सुविधाओं के अभाव में खेल प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर नहीं मिल रहा है। लंबे समय से जिला को खेलों के क्षेत्र में कोई विशेष बजट नहीं मिला है। इसके अलावा जिलेभर के करीब 3 हजार खिलाड़ियों में से 5 कोच महज 300 खिलाड़ियों को ही विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। ऐसे में जिले की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने के नाम पर महज पांच राजीव गांधी खेल स्टेडियम व दो जिला स्तरीय खेल स्टेडियम हैं। यह सभी स्टेडियम देखरेख के अभाव में जर्जर होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। लाखों रुपये खर्च कर खिलाड़ियों के लिए लगाए गए खेल उपकरण भी देखरेख के अभाव में जंग खा रहे हैं। ऐसे में जिला के खिलाड़ियों को दी जा रही खेल सुविधाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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प्रतिभाओं को भी आगे आने का अवसर नहीं मिल रहा
जिला में खेलों के लिए मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। ऐसे में जिले की प्रतिभाओं को भी आगे आने का अवसर नहीं मिल रहा है। प्रशिक्षण के लिए महज पांच कोच हैं जो जिलेभर के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने में भी असमर्थ हैं। जिला में कबड्डी, वॉलीबाल, बॉक्सिंग, खो-खो, तीरंदाजी सहित एथलेटिक खेलों के लिए प्रशिक्षकों का टोटा है। प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है लेकिन जिला अभी भी खेलों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से महरूम है।
जिला में राजीव गांधी खेल स्टेडियम पाली, छिथरोली, डोहर कलां, सीहमा व धोलेड़ा में पांच खेल स्टेडियम हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ स्पोर्ट्स कांपलेक्स व नारनौल में नेताजी सुभाषचंद्र बोस खेल मैदान हैं। इनमें से अधिकांश स्टेडियमों में साफ सफाई एवं देखरेख के अभाव में झाड़ियां उग चुकी हैं। इनमें से भी अधिकांश पर ताले लटके हुए हैं। स्टेडियम जिला में दी जा रही खेल सुविधाओं की हालत बयां कर रहे हैं।
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जिला के 3 हजार खिलाड़ियों के लिए कम से कम 50 कोच की आवश्यकता है लेकिन महज पांच कोच ही जिला खेल विभाग के पास उपलब्ध हैं। जिनमें से धर्मपाल सिंह वॉलीबाल कोच, नरेंद्र कनिष्ठ कुश्ती कोच, विनय कुमार तीरंदाजी, विवेक जूडो व कुमारी मोनिका बॉक्सिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। ऐसे में जिले की अन्य खेल प्रतिभाएं भी दम तोड़ रही हैं।
जिले में इस समय 15 कोच की आवश्यकता है। विभाग के उच्चाधिकारियों से शीघ्र मांग पत्र भेजकर प्रशिक्षकों की कमी को पूरा कराया जाएगा। इसके अलावा स्टेडियमों में जहां-जहां कमियां हैं उन्हें शीघ्र दूर करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। -परसराम, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी।
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