महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ में अफगानिस्तान की बदली परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप भारत व एशियाई देशों पर हो रहे इसके प्रभावों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरूआत शुक्रवार को हुई। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएसएसआर) द्वारा प्रायोजित तथा लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के सहयोग से हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने तालिबानी के काबुल पर कब्जे के लिए निर्धारित 15 अगस्त की तिथि को भारत के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अवश्य ही यह पूर्व निर्धारित योजना के तहत किया गया है।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि यह विषय बेहद समसामयिक है। उन्होंने कहा कि हमें इस आयोजन के माध्यम से अफगानिस्तान के बदले हालात के कारणों और उससे देश - दुनिया पर पड़ने वाले प्रभावों को जानने और समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अवश्य ही इस आयोजन के माध्यम से इस विषय से संबंधित विभिन्न आयामों को जानने समझने का अवसर मिलेगा और आयोजन के पश्चात एक विस्तृत रिपोर्ट आईसीएसएसआर के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में इंडिया फाउंडेशन के निदेशक कैप्टन आलोक बंसल ने संगोष्ठी के विषय को विस्तार से प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता कैप्टन आलोक बंसल ने कहा कि सामाजिक विज्ञान एक ऐसा विषय है जिसमें परिस्थितियों के अनुरूप परिणामों में परिवर्तन देखने को मिलता है। उन्होंने अफगानिस्तान के बदले हालातों और उससे भारत व एशिया पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर भी इशारा किया। तालिबानी के काबुल पर कब्जे के लिए निर्धारित 15 अगस्त की तिथि को भारत के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया और कहा कि अवश्य ही यह पूर्व निर्धारित योजना के तहत किया गया है।
विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। शुरूआत में स्वागत भाषण विभाग के सहआचार्य डॉ. शांतेष कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी की रूपरेखा आयोजन सचिव डॉ. राजीव कुमार सिंह ने प्रस्तुत की। पहले दिन आयोजित उद्घाटन सत्र के अतिरिक्त अन्य सत्रों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. संजय श्रीवास्तव और गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. मनीष व लेखिका सुश्री निधि बहुगुणा ने अफगानिस्तान में बदले हालातों और इसमें अमेरिका की भूमिका और इसके हितों की चर्चा की। वक्ताओं ने भारत की विदेश नीति में तथा एशियाई देशों पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ. मनीष ने चीन के तालिबान के साथ बढ़ते संबंधों पर भी चर्चा की। इस मौके पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से आए शोधार्थियों के अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।