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साइकिल के हैंडल से लेकर गाड़ियों के डैशबोर्ड की शोभा बढ़ा रहे रेडियो

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विश्व रेडियो दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यअतिथि को सम्मानित करते कार्यक्रम आयोजक । संवाद - फोटो : Narnol
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आधुनिकता के इस दौर में भी रेडियो का अपना एक विशेष स्थान है। सूचना क्रांति के इस दौर में इंटरनेट को सूचनाओं का समुद्र माना गया है। लेकिन विश्वसनीयता के मामले में रेडियो आज भी भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि मोबाइल, इंटरनेट व विभिन्न सामाजिक मीडिया की चकाचौंध के बावजूद आज भी रेडियो करोड़ों देशवासियों के दिलों में बसता है। यह बात सहायक सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी धर्मेंद्र कादियान रविवार को विश्व रेडियो दिवस पर रेडियो अरावली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता दक्षिणी हरियाणा सांस्कृतिक मंच के प्रधान एवं रेडियो अरावली के फाउंडर संतलाल ने की।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में रेडियो सूचना एवं प्रौद्योगिकी के साथ सामंजस्य बैठाते हुए डिजिटल प्रारूपों में लोकप्रिय हो रहा है। सामुदायिक रेडियो के आगमन के बाद अब स्थानीय स्तर की जरूरतों के अनुसार उनकी ही भाषा में कार्यक्रम सुनने को मिल रहे हैं। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के इस दौर में स्थानीय स्तर की सूचनाएं लोगों तक पहुंचाने में सामुदायिक रेडियो का सबसे बड़ा रोल रहा है। रेडियो जन संचार का महत्वपूर्ण माध्यम है, जो देश के विकास में अपना अहम योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि युग बदलते गए। लेकिन रेडियो ने अपनी जगह बरकरार रखी है। लकड़ी के बड़े बॉक्स में ट्रांजिस्टर के जरिये बजने वाला रेडियो आज डिजिटल होकर छोटे से मोबाइल में समा गया है। दशकों पहले साइकिल के हैंडल पर लटकता रेडियो समृद्धि की पहचान माना जाता था। आज के दौर की बात करें तो वहीं रेडियो महंगी से महंगी गाड़ियों के डैशबोर्ड की शान बढ़ा रहा है। उसका स्वरूप भले ही बदल गया हो, लेकिन इस बदलते स्वरूप ने अमीरी और गरीबी का फर्क मिटा दिया है।
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एक कार में बैठकर भी विभिन्न एफएम चैनल के माध्यम से कार्यक्रमों का लुत्फ उठा रहे हैं तो रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का पेट पालने वाला गरीब इंसान भी मनोरंजन की मस्ती में मशगूल है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद सामुदायिक रेडियो अरावली द्वारा 2019 से क्षेत्र के लोगों के लिए कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, ज्ञान-विज्ञान सहित लोकगीतों द्वारा आम जन के मनोरंजन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का प्रसारण किया जा रहा है, जो क्षेत्र के लिए गौरव पूर्ण है।
रेडियो अरावली पर रेडियो दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हास्य कवि सरदार मंजीत सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का मनोरंजन किया। इस अवसर पर भूप सिंह भारती, डॉ. छतर सिंह, डॉ. सुनील कुमार, नीरज राव ने भी प्रस्तुति दी। इस दौरान रेडियो अरावली से सचिन, पूर्व प्राचार्य वीके शर्मा, एकता योगी व नेहा ने भी अपने विचार रखे।
देश में रेडियो का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। जब देश में मनोरंजन के साधन बहुत कम थे, तब रेडियो ही लोगों का एकमात्र सहारा था। वर्ष 2011 में यूनेस्को ने विश्व स्तर पर रेडियो दिवस मनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए 13 फरवरी का दिन चुना गया, क्योंकि 13 फरवरी 1946 से संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने रेडियो प्रसारण की शुरुआत की थी।
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